लॉरेंस बिश्नोई गैंग दाऊद की 'डी-कंपनी' से जुड़ा अंडरवर्ल्ड मॉडल है? खौफ का दूसरा नाम, कैसे करता है काम
अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के बाद एक बार फिर से लॉरेंस बिश्नोई गैंग की चर्चा हो रही है। लॉरेंस बिश्नोई खुद तो साबरमती के सेंट्रल जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद है। फिर उसके गैंग का नेटवर्क विदेश से कैसे ऑपरेट होता है?

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती सेंट्रल जेल की हाई-सिक्योरिटी बैरक में बंद है, लेकिन अक्सर हाई-प्रोफाइल हस्तियों, गायकों और राजनेताओं को निशाना बनाता रहा है। अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद उसका विदेशी नेटवर्क एक बार फिर चर्चा में है। रविवार को मुंबई में तीन हमलावरों ने अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां चलाईं। लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो कथित सदस्यों ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसमें से एक अमेरिका में रहने वाले अनिल पंडित ने अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है।
कैसे काम करता है लॉरेंस बिश्नोई गैंग?
हाल ही में अनिल पंडित ने गिरोह की ओर से खुद को चर्चा में लाने की कोशिश की है, ताकि लोगों का ध्यान अमेरिका में बिश्नोई के सहयोगी सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ से हट सके, जिसकी तलाश फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) कर रही है। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि श्रॉफ को निशाना बनाने के बारे में सोशल मीडिया पर पंडित का दावा सच लगता है। वहीं, जांचकर्ता इस गिरोह के व्यापक नेटवर्क की भी पड़ताल कर रहे हैं, जिसमें एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल और शूटर्स तक विदेशी हथियारों की सप्लाई शामिल है।
FBI ने इस गिरोह को 'लॉरेंस बिश्नोई ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप' (OCG) का नाम दिया है। यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार काम करने, विदेश से स्थानीय शूटर्स को भर्ती करने और बड़े लोगों को निशाना बनाकर व्यापारियों को धमकाने में सक्षम है, ताकि वे अपने कामकाज के लिए उनसे फंड वसूल सकें।
बता दें कि अभिनेता टाइगर श्रॉफ से पहले, इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने बॉलीवुड सितारों सलमान खान, रणवीर सिंह, आमिर खान और निर्देशक रोहित शेट्टी को भी धमकी दी थी और उन्हें अपना निशाना बनाया था। मई 2022 में मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या कर दी गई थी, और अक्टूबर 2024 में महाराष्ट्र के नेता बाबा सिद्दीकी की भी हत्या कर दी गई। इन हत्याओं के पीछे भी लॉरेंस बिश्नोई का ही हाथ बताया जाता है।
कौन है अनिल पंडित ?
हरियाणा के पानीपत जिले के रैर कलां गांव का रहने वाला 32 वर्षीय पंडित, 2023 में भारत से भाग गया था। कहा जाता है कि वह थाईलैंड और कनाडा होते हुए अमेरिका पहुंच गया। इस साल जुलाई में अमेरिका में दायर एक आरोप-पत्र के अनुसार, उसके संबंध गैंगस्टर रणदीप मलिक और कनाडा में रहने वाले रविंदर सिंह ढांडा से हैं, जो लॉरेंस बिश्नोई के संगठित अपराध गिरोह (OCG) के साथ काम करते हैं।
भारतीय जांच एजेंसियों का कहना है कि अनिल पंडित कैलिफोर्निया से अपना काम चलाता है और ऐसा शक है कि वह गोल्डी बराड़ के भी संपर्क में है। टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने से पहले, इस साल उसका नाम गोलीबारी और जबरन वसूली की कई घटनाओं में सामने आया था। इनमें पश्चिमी दिल्ली में गायक गुरु रंधावा से जुड़े एक जिम मालिक पर गोलीबारी, पुणे के एक ज्वेलरी शोरूम में फायरिंग, और भिवाड़ी तथा सोनीपत में हुए दो हमले शामिल हैं।
दिल्ली और हरियाणा पुलिस इन घटनाओं की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता चला है कि शूटर्स से संपर्क करने और विदेशों में बने हथियारों को मंगवाने के लिए 'सिग्नल' (एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप) का इस्तेमाल किया गया था।
कौन है हरमन संधू?
हाल ही के हमले में एक और मुख्य संदिग्ध हरमनवीर सिंह उर्फ हरमन संधू का नाम सामने आ रहा है, जिसे जून में FBI की 'वांटेड' लिस्ट में भी शामिल किया गया था। बताया जाता है कि संधू, रविंदर ढांडा नेटवर्क का सदस्य है, जो बिश्नोई गैंग के साथ मिलकर काम करता है और उसे जुलाई में कैलिफोर्निया में FBI ने हिरासत में ले लिया था। अब इस बात की जांच की जा रही है कि ' टाइगर श्रॉफ शूटिंग' मामले में उसका नाम कैसे सामने आया।
23 जून को, अमेरिका के कैलिफोर्निया (लॉस एंजिल्स) स्थित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने संधू के खिलाफ एक फेडरल अरेस्ट वारंट जारी किया था। उस पर प्रतिबंधित पदार्थों को रखने, उन्हें बांटने की साजिश रचने और उन्हें निर्यात करने की साजिश रचने जैसे आरोप लगाए गए थे। जांचकर्ताओं का कहना है कि संधू कथित तौर पर टारगेट की पहचान करने, शूटर्स के बीच तालमेल बिठाने, हथियारों का इंतजाम करने या बातचीत में मदद करने जैसे कामों में शामिल था।
क्या है 'ऑपरेशन हार्ड बॉल'?
जुलाई में, अमेरिकी अधिकारियों ने 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' की घोषणा की। यह अमेरिका, कनाडा और यूरोप के बीच एक संयुक्त कानून-प्रवर्तन अभियान था, जिसमें भारत के 37 गैंगस्टरों के खिलाफ तीन संघीय अभियोग (federal indictments) दायर किए गए और उनमें से 24 को गिरफ्तार कर लिया गया। ये लोग लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
अमेरिकी अभियोजकों ने बताया कि लॉरेंस बिश्नोई भारत के गुजरात के साबरमती जेल के हाई सिक्योरिटी बैरक से अपने आपराधिक नेटवर्क को चलाता है। इसके लिए वह प्रतिबंधित मोबाइल फोन और वॉयस-ओवर-इंटरनेट-प्रोटोकॉल (VoIP) उपकरणों का इस्तेमाल करता है। इन गतिविधियों में टारगेट किलिंग, गोलीबारी, जबरन वसूली, अपहरण, नशीले पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसे अपराध शामिल हैं।
लोगों के मन में खौफ पैदा करना है मकसद?
लॉरेंस बिश्नोई के अलावा, FBI ने गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा का भी नाम लिया है। बताया गया है कि वे उसके मुख्य सहयोगी (senior lieutenants) के रूप में काम करते थे और अलग-अलग देशों में मौजूद गिरोह के सदस्यों और साथियों को निर्देश देने में मदद करते थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये गिरोह बड़े पैमाने पर हिंसा करते हैं और ऑनलाइन जिम्मेदारी लेते हैं ताकि लोगों के मन में डर पैदा किया जा सके, खासकर भारत में और विदेशों में रह रहे भारतीय समुदायों के बीच। फिर, वे इसी डर का फायदा उठाकर लोगों से जबरन वसूली करते हैं।
अमेरिकी अभियोजकों ने जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का जिक्र किया, जिसे बिश्नोई गैंग ने अंजाम दिया था। FBI ने इस आपराधिक नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय कोकीन तस्करी और प्रतिद्वंद्वी आपराधिक समूहों की नशीले पदार्थों की खेप चुराने के मामलों से जोड़ा है।
डी-कंपनी की तरह काम करता है लॉरेंस बिश्नोई गैंग?
- गैंगस्टरों की जांच करने वाले भारतीय जांचकर्ताओं के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट एक ऐसा नेटवर्क है जो अलग-अलग देशों में फैला हुआ है। इसमें जेल में बंद गैंगस्टर, विदेशों से काम करने वाले हैंडलर, स्थानीय शूटर और फाइनेंसर शामिल हैं।
- नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने मार्च 2023 की एक चार्जशीट में बताया है कि कैसे उत्तर भारत के गैंगस्टर खालिस्तान-समर्थक तत्वों से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।
- एजेंसी ने 2015 के बरगारी आंदोलन और 2016 की नाभा जेल ब्रेक की घटना को इस नेटवर्क के विस्तार में अहम पड़ाव माना है। खालिस्तान-समर्थक तत्वों को अनुभवी शूटरों, हथियारों और लॉजिस्टिक सपोर्ट की जरूरत थी, जबकि गैंगस्टरों को अत्याधुनिक हथियारों और फंडिंग के नए स्रोतों की तलाश थी। यहीं पर बिश्नोई गैंग ने मदद की पेशकश की।
- एजेंसी ने बताया कि बिश्नोई सिंडिकेट पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड तक फैला हुआ है।
- आपराधिक गतिविधियों से जुटाया गया पैसा कनाडा, अमेरिका, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भेजा जाता था, ताकि वहां मौजूद गैंग के सदस्यों की मदद की जा सके।
- एजेंसी ने इस नेटवर्क की पहुंच और संपर्कों की तुलना 1990 के दशक में दाऊद इब्राहिम की 'डी-कंपनी' से जुड़े अंडरवर्ल्ड मॉडल से की है।
पुलिस के सामने क्यों चुनौती है ये गैंग?
अनिल पंडित और पूरे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क का काम टाइगर श्रॉफ और अन्य बड़ी हस्तियों को निशाना बनाना, भारतीय एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती को दर्शाता है। इसके पीछे कारण यह है कि इन गतिविधियों को चलाने वाले हैंडलर देश के बाहर से काम करते हैं, जबकि उनके द्वारा काम पर रखे गए हजारों शूटर स्थानीय स्तर पर हमलों को अंजाम देते हैं। ये शूटर ज्यादातर बेरोजगार युवा होते हैं जिन्हें ऑनलाइन भर्ती किया जाता है। इन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं होती कि इनके हैंडलर कहां हैं या पूरा ऑपरेशन कैसे चल रहा है। इन्हें बस पैसे और हथियार मिल जाते हैं, और ये अपराध की दुनिया में अपना नाम बनाने के लिए हमलों को अंजाम देते हैं।
संदिग्ध हैंडलर और हमला करने वालों के बीच संचार की कड़ी का पता लगाना, हथियारों और पैसों के लेन-देन को समझना, और यह तय करना कि क्या अलग-अलग घटनाएं एक ही आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी हैं, ये सब एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
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