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MLC का काम क्या होता है, इसका चुनाव कैसे होता है? विधान पार्षद को कितनी मिलती है सैलरी

देश के चार राज्यों में एमएलसी चुनाव संपन्न हो चुका है। कौन होते हैं विधान पार्षद, उनका क्या काम होता है, उन्हें कितनी सैलरी मिलती है। जानें सबकुछ इस एक्सप्लेनर में...

एमएलसी चुनाव कैसे होता है- India TV Hindi
एमएलसी चुनाव कैसे होता है

देश के चार राज्यों की आठ विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव संपन्न हो चुके हैं। इन चुनावों में मिले जुले रिजल्ट आए हैं। ऐसे में सबसे पहले मन में सवाल उठता है कि आखिर ये एमएलसी क्या होता है, ये कौन होते हैं और इनका काम क्या होता है, इनका चुनाव कैसे होता है और इन्हें सैलरी कितनी मिलती है? MLC का फुल फॉर्म Member of Legislative Council होता है, जिसे हिंदी में विधान परिषद सदस्य कहा जाता है। जिस तरह केंद्र में राज्यसभा (उच्च सदन) होती है, उसी तरह भारत के कुछ राज्यों में विधान परिषद (उच्च सदन) होती है और इसके सदस्यों को MLC कहा जाता है।

MLC का चुनाव कैसे होता है?

  • MLC का चुनाव अप्रत्यक्ष (Indirect) तरीके से होता है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के लोग वोट डालते हैं, इनका चुनाव सीधे जनता नहीं करती है।
  • 1/3 सदस्य: राज्य के विधायकों (MLAs) द्वारा चुने जाते हैं।
  • 1/3 सदस्य: स्थानीय निकायों जैसे नगर पालिका, जिला पंचायत के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं।
  • 1/12 सदस्य: उन शिक्षकों द्वारा चुने जाते हैं जो कम से कम 3 साल से माध्यमिक स्कूल या उससे ऊपर पढ़ा रहे हों।
  • 1/12 सदस्य: राज्य के रजिस्टर्ड स्नातकों (Graduates) द्वारा चुने जाते हैं, जिन्होंने 3 साल पहले ग्रेजुएशन पूरी कर ली हो।
  •  बाकी बचे सदस्य (लगभग 1/6): राज्यपाल (Governor) द्वारा कला, विज्ञान, साहित्य और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से सीधे मनोनीत किए जाते।

एमएलसी का कार्यकाल

  • इनका कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
  • यह एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता, बल्कि इसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य हर 2 साल में रिटायर होते हैं।
  • MLC बनने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए।

क्या यह सभी राज्यों में होते हैं?

  • भारत के सभी राज्यों में विधान परिषद (MLC) नहीं होती है।
  • वर्तमान में यह व्यवस्था केवल भारत के 6 राज्यों में है।
  • कुछ राज्यों में भी विधायिका के दो सदन होते हैं।
  • विधानसभा निचला सदन है, जबकि विधान परिषद उच्च सदन है।

1. उत्तर प्रदेश
2. बिहार
3. महाराष्ट्र
4. कर्नाटक
5. आंध्र प्रदेश
6. तेलंगाना

बाकी राज्यों में केवल विधानसभा होती है, इसलिए वहां सिर्फ MLA होते हैं, MLC नहीं।

विधान परिषद का उद्देश्य

विधान परिषद का उद्देश्य राज्य के कानून बनाने की प्रक्रिया में एक अतिरिक्त स्तर पर विचार-विमर्श करना है। इसमें शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी प्रतिनिधित्व मिल सकता है। 

एमएलसी के पास क्या-क्या पावर होती हैं?

एमएलसी कानून बनाने की प्रक्रिया में भाग ले सकता है, सरकार से सवाल पूछ सकता है और राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस कर सकता है। हालांकि, उसकी शक्तियां विधानसभा के सदस्य जैसी हर मामले में नहीं होतीं।जिन राज्यों में विधान परिषद है, वहां सामान्य विधेयक विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है। लेकिन विधेयक को कानून बनने की प्रक्रिया में दोनों सदनों की भूमिका और संविधान में निर्धारित नियम महत्वपूर्ण होते हैं।

एमएलसी को क्या मिलती हैं सुविधाएं

  • मूल वेतनः पद के लिए निर्धारित मासिक सैलरी।
  • भत्तेः निर्वाचन क्षेत्र, कार्यालय, यात्रा, संचार और अन्य निर्धारित कार्यों के लिए मिलने वाली राशि।
  • सुविधाएं: आवास, चिकित्सा, यात्रा या दूसरी ऐसी सुविधाएं, जो नियमों के तहत उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • हर भत्ता सीधे मिलने वाली नकद आय नहीं होता। कुछ भुगतान वास्तविक खर्च की प्रतिपूर्ति के रूप में होते हैं और कुछ पर निर्धारित शर्तें लागू होती हैं।
  • वेतन के अलावा एमएलसी को अपने कामकाज के लिए कई तरह की सुविधाएं मिल सकती हैं। हालांकि, इनका स्वरूप और सीमा राज्य के नियमों पर निर्भर करती है।
  • आवास की सुविधाः कुछ राज्यों में सदस्यों को राजधानी में सरकारी आवास, विधायक निवास या निर्धारित आवास भत्ता दिया जाता है। यह सुविधा सभी राज्यों में एक जैसी नहीं होती।
  • यात्रा भत्ताः सदन की बैठकों, समिति की बैठकों और आधिकारिक कार्यों के लिए यात्रा संबंधी भत्ते या खर्च की प्रतिपूर्ति मिल सकती है। कुछ राज्यों में यात्रा की दूरी, श्रेणी और उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग दरें लागू होती हैं।
  • चिकित्सा सुविधाः राज्य के नियमों के अनुसार सदस्य को सरकारी अस्पतालों में इलाज, चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति या अन्य निर्धारित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं। परिवार के सदस्यों की पात्रता भी संबंधित नियमों पर निर्भर करती है।
  • टेलीफोन और संचार सुविधाः आधिकारिक कामकाज के लिए फोन, इंटरनेट या संचार संबंधी खर्चों पर भत्ता या निर्धारित सीमा तक प्रतिपूर्ति की व्यवस्था हो सकती है।
  • कार्यालय और सचिवीय सहायताः कुछ राज्यों में कार्यालय संबंधी खर्च, स्टेशनरी, कंप्यूटर या सचिवीय सहायता के लिए निर्धारित भत्ते दिए जाते हैं।
  • सदन और समिति की बैठकों का दैनिक भत्ताः निर्धारित बैठकों में शामिल होने पर नियमों के अनुसार दैनिक भत्ता मिल सकता है। इसकी दर और पात्रता राज्य के हिसाब से अलग होती है।
  • पेंशनः पूर्व एमएलसी को पेंशन भी मिलती है। यूपी में एमएलसी को उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल (सदस्यों के परिलब्धियां और पेंशन) अधिनियम, 1980 के तहत आजीवन पेंशन और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं।

एमएलसी को कितनी मिलती है सैलरी

1. उत्तर प्रदेश (UP)
 
• कुल मासिक पैकेज: लगभग ₹2.66 लाख से ₹2.96 लाख प्रति माह (वेतन और भत्तों को मिलाकर)।
• मूल वेतन: ₹35,000 प्रति माह (1 अप्रैल 2025 से प्रभावी)।
• प्रमुख भत्ते:
• निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: ₹75,000 प्रति माह
• चिकित्सा भत्ता: ₹45,000 प्रति माह
• सचिव/कार्यालय भत्ता: ₹30,000 प्रति माह
• टेलीफोन भत्ता: ₹9,000 प्रति माह
• समिति की बैठक का भत्ता: ₹2,500 प्रति बैठक
 
2. महाराष्ट्र
 
• कुल मासिक वेतन: लगभग ₹2.52 लाख प्रति माह (वेतन और भत्ते मिलाकर)।
 
3. बिहार
 
• कुल मासिक वेतन: लगभग ₹1.60 लाख से ₹1.70 लाख प्रति माह।
• अन्य सुविधाएं: आजीवन ₹45,000 पेंशन, मुफ्त चिकित्सा सुविधा, यात्रा कूपन और कार लोन की सुविधा मिलती है।
 
4. तेलंगाना
 
• कुल मासिक वेतन: लगभग ₹2.50 लाख प्रति माह।

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