तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच अब सबसे बड़ा विवाद 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर खड़ा हो गया है। यह दुनिया का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वर्षों से मध्य पूर्व का तेल और प्राकृतिक गैस सुरक्षित रूप से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता रहा है। लेकिन अब ईरान और अमेरिका दोनों इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना प्रभाव और नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। इससे पूरी दुनिया की एनर्जी सप्लाई और समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य एक संकरा और मुड़ाव वाला समुद्री रास्ता है, जो ईरान और ओमान के तटों के बीच स्थित है। दशकों से इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद समुद्री मार्गों में गिना जाता रहा है। इसी रास्ते से मध्य पूर्व का बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस दुनिया के बाजारों तक पहुंचती है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से हुए हमलों के बाद ईरान ने दावा किया कि होर्मुज पर उसका अधिकार है। इसके बाद वहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने लगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई और तेल की कीमतें बढ़ने लगीं।
अमेरिका और ईरान का ताजा रुख क्या है?
सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अब से अमेरिका को 'होर्मुज जलडमरूमध्य का संरक्षक' माना जाएगा। वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड, जो देश की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता की जिम्मेदारी संभालती है, ने दावा किया कि जलडमरूमध्य पर नियंत्रण ईरान का है। गार्ड ने कहा कि वह 'दुनिया के दूसरे छोर से आई एक दुष्ट और बच्चों की हत्या करने वाली सेना' को यहां गैरकानूनी दखल नहीं देने देगा।
होर्मुज पर अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?
1982 में बने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुसार कोई भी देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री जल पर अपना दावा नहीं कर सकता। सभी देशों के जहाजों को ऐसे जलमार्गों से बिना किसी रुकावट के गुजरने का अधिकार है। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि अमेरिका और ईरान दोनों ने इस संधि की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय कानून कार्यक्रम के निदेशक मार्क वेलर का कहना है कि यह नियम अब अंतरराष्ट्रीय परंपरागत कानून (Customary International Law) का हिस्सा बन चुका है। इसलिए हर हाल में दुनिया के हर देश को इसे मानना होगा।
ईरान ने जहाजों के लिए क्या नए नियम बनाए?
युद्ध की शुरुआत में ईरान ने गुजरने वाले जहाजों पर हमले किए और कुछ मामलों में सुरक्षित रास्ता देने के बदले भुगतान की मांग भी की। हमले की आशंका इतनी बड़ी थी कि कई जहाजों ने इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया। पिछले महीने सीजफायर लागू होने के बाद ईरान ने कहा कि सभी जहाजों को हाल ही में बनाए गए पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी में रजिस्ट्रेशन कराना होगा, ताकि उनके क्रू और माल की जांच की जा सके। इसके साथ ही ईरान ने जहाजों से कहा कि वे ओमान के तट के बजाय ईरान के तट के पास वाले मार्ग का इस्तेमाल करें।
Image Source : APईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जहाजों पर कई हमले किए हैं।
बता दें कि अमेरिका पहले जहाजों को ओमान के रास्ते सुरक्षित निकालने में मदद कर रहा था। ईरान ने होर्मुज के मध्य हिस्से में बारूदी सुरंगें भी बिछा दी हैं। इसी वजह से बहुत कम जहाज उस रास्ते से गुजर रहे हैं। ब्रिटेन के यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर के मुताबिक 25 जून के बाद से ओमान के पास इस समुद्री मार्ग में 6 जहाजों पर हमले होने की रिपोर्ट मिली है। इन हमलों के पीछे ईरान पर संदेह जताया जा रहा है।
अंतरिम समझौते को लेकर दोनों देशों में मतभेद
अमेरिका का कहना है कि पिछले महीने हुए अंतरिम समझौते के तहत होर्मुज को दोबारा सामान्य रूप से खोला जाना था, ताकि स्थायी समझौते तक जहाजों की आवाजाही जारी रह सके। लेकिन ईरान का दावा है कि उसी समझौते की एक शर्त उसे जहाजों की आवाजाही का प्रबंधन करने का अधिकार देती है। ईरान का कहना है कि यदि वह 60 दिनों तक कोई शुल्क नहीं लेता, तो संचालन की शर्तें तय करना उसका अधिकार है।
Image Source : APअंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' एक खुला समुद्री मार्ग है।
समझौते में कहा गया था कि ईरान 'अपनी पूरी कोशिश करेगा कि वाणिज्यिक जहाजों को फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच 60 दिनों तक बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवाजाही मिल सके।' साथ ही, समझौते में यह भी कहा गया था कि ईरान और ओमान भविष्य में जलडमरूमध्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को लेकर आपसी बातचीत करेंगे।
अब अमेरिका भी होर्मुज में वसूलेगा फीस?
सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले माल पर अमेरिका 20 प्रतिशत शुल्क लगाएगा। उनका कहना है कि यह राशि इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की लागत के लिए होगी। यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले अमेरिका समुद्री मार्गों पर इस तरह के शुल्क का विरोध करता रहा है। इससे पहले ईरान भी जहाजों से शुल्क लेने की बात कह चुका था। उसने संकेत दिया था कि यह राशि प्रति जहाज 20 लाख डॉलर तक हो सकती है।
ईरान ने ट्रंप के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
सोमवार देर रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रंप के बयान का हवाला देते हुए व्यंग्य किया। उन्होंने लिखा कि यदि कोई देश होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराता है तो उसे इसके लिए भुगतान मिलना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि 20 प्रतिशत शुल्क बहुत ज्यादा है और ईरान इससे ज्यादा 'उचित' व्यवस्था करेगा।
Image Source : APअब्बास अरागची ने डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर तंज कसते हुए जवाब दिया है।
क्या कानून शुल्क लेने की इजाजत देता है?
मार्क वेलर के अनुसार अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से केवल उस स्थिति में शुल्क लिया जा सकता है, जब उसके बदले कोई वास्तविक सेवा, जैसे पायलट सेवा या सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जा रहा हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मैगेलन जलडमरूमध्य में चिली जहाजों से पायलट सेवा और अन्य सुरक्षा सुविधाओं के बदले शुल्क लेता है। लेकिन किसी देश को केवल कमाई के उद्देश्य से भारी-भरकम टोल लगाने का अधिकार नहीं है। इसलिए प्रति जहाज 20 लाख डॉलर जैसी राशि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक नहीं मानी जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन का क्या कहना है?
संयुक्त राष्ट्र की समुद्री सुरक्षा एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने कहा है कि वह अमेरिका के नए प्रस्ताव का इंतजार कर रही है। हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से केवल गुजरने के लिए टोल या शुल्क लेने के खिलाफ उसका रुख पहले जैसा ही है। इस तरह देखा जाए तो होर्मुज को लेकर विवाद अब केवल समुद्री मार्ग का मुद्दा नहीं रह गया है। यह अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक, सैन्य और आर्थिक शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन चुका है। यदि यह टकराव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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