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Fact Check: फिलिस्तीन को आजाद करने के लिए केरल में तैयारी कर रही इस्लामिक सेना? जानें क्या है वायरल वीडियो की सच्चाई

India TV Fact Check: कई पोस्ट में यह दावा किया गया है कि फिलिस्तीन को आजाद करने के लिए केरल में इस्लामिक सेना तैयारी कर रही है। हालांकि, फिलिस्तीन में शांति समझौता हो चुका है।

KERALA VIRAL VIDEO- India TV Hindi
Image Source : X/VIRAL VIDEO SCREENSHOT वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट

गाजा में दो साल से जारी युद्ध शुक्रवार (10 अक्टूबर) को थम गया। इजरायल और हमास के बीच शांति समझौता होने के बाद इजरायल की सेना गाजा पट्टी से लौटना शुरू कर चुकी है। इस बीच सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कहा जा रहा है कि भारत में इस्लामिक सेना फिलिस्तीन को आजाद कराने के लिए तैयारी कर रही है। वायरल वीडियो में कई सैनिक परेड करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को कई सोशल मीडिया हैंडल से शेयर किया गया है। हालांकि, इंडिया टीवी ने जब इस वीडियो की पड़ताल की तो हकीकत कुछ और निकली।

वायरल वीडियो में क्या दावा किया?

वायरल वीडियो में कई युवाओं को एक वर्दी में परेड करते हुए और कुछ गाते हुए देखा जा सकता है। वर्दी गहरे हरे रंग की है और उनके हाथ में सफेद रंग के दस्ताने भी हैं। परेड कर रही पलटन की अगुआई कर रहा व्यक्ति हाथ में फिलिस्तीन का झंडा लेकर चल रहा है। परेड कर रहे लोगों के पास कुछ बच्चे भी खड़े हुए नजर आ रहे हैं, जो पूरी तरह से सफेद रंग के कपड़े पहने हैं और सफेद टोपी भी लगाए हुए हैं।

वायरल वीडियो को शेयर करते हुए एक एक्स हैंडल पर लिखा गया "फिलिस्तीन की सेना केरल में। केरल के कोट्टापुरम में इस्लामिक सेना नामक संगठन फिलिस्तीन को आजाद कराने के लिए मार्च कर रहा है। क्या ऐसी धर्मिक सेना देश के लिए धातक नहीं है?" एक अन्य यूजर ने लिखा "ये पढ़े-लिखे,सेक्युलर और मोहब्बत की दुकान वाला केरल है। फ़िलिस्तीन को आज़ाद कराने के लिए केरल के कोट्टापुरम मे इस्लामिक सेना नामक संगठन मार्च कर रहा है।"

Image Source : X/Viral Video Screenshotवायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट

पड़ताल में क्या मिला?

वायरल वीडियो की पड़ताल की गई तो पता चला कि यह वीडियो फेक नहीं है, लेकिन पुराना है। यह 2020 का पीएफआई यूनिटी मार्च है। यह मार्च केरल के एर्नाकुलम में हुआ था। वीडियो में प्रतिभागी फिलिस्तीन के झंडे लेकर मार्च कर रहे थे। अब इस पांच साल पुराने वीडियो की झूठे दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। इससे पहले भी इस वीडियो को कई अलग-अलग दावों के साथ शेयर किया जा चुका है। उस समय भी फैक्ट चेक किया गया था और दावे गलत पाए गए थे।

फैक्ट चेक का नतीजा

इंडिया टीवी के फैक्ट चेक में सामने आया कि वायरल वीडियो फेक नहीं है, लेकिन पुराना है और उसके साथ किया जा रहा दावा पूरी तरह से फर्जी है। 2020 में भी यह मार्च फिलिस्तीन को आजाद कराने के लिए नहीं हुआ था और कोई भी सेना ऐसी तैयारी नहीं कर रही है। पुराने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावे पूरी तरह से फर्जी हैं। लोगों को ऐसी किसी भी पोस्ट से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।

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