लिवर की सबसे बड़ी दुश्मन हैं ये आदतें

लिवर शरीर का सबसे बड़ा अंग है। कहा जाता है कि लिवर में खुद को ठीक करने की ताकत होती है। लेकिन कई बार लंबे समय में कुछ आदतें लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाने लगती हैं। लोगों को इन आदतों के बारे में पता भी नहीं चलता और लिवर अंदर ही अंदर खराब होने लगता है।
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लिवर शरीर का सबसे बड़ा अंग है। कहा जाता है कि लिवर में खुद को ठीक करने की ताकत होती है। लेकिन कई बार लंबे समय में कुछ आदतें लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाने लगती हैं। लोगों को इन आदतों के बारे में पता भी नहीं चलता और लिवर अंदर ही अंदर खराब होने लगता है।
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एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड ट्रेंड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सेठी ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया है कि आपकी कौन सी आदतें लिवर की सबसे बड़ी दुश्मन हैं। इसमें सबसे ऊपर है आपकी रोजाना शराब पीने की आदत। कुछ लोगों को लगता है कि दिन में एक बार शराब पीना, खासकर एक गिलास रेड वाइन शरीर के लिए नुकसानदायक नहीं है। लेकिन ऐसा नहीं है। इससे लिवर पर बुरा असर होता है।
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डॉक्टर सौरभ सेठी के मुताबिक लिवर को स्वस्थ रखने के लिए शराब की कोई लिमिट सेफ नहीं है। आपका लिया हर एक घूंट आपके लीवर पर मेटाबॉलिक बोझ बढ़ाता है और धीरे-धीरे कई सालों में ये कभी न बदलने वाला डैमेज पहुंचा देता है। अब तक जो मामले आए हैं उससे पता चलता है कि मीडियम मात्रा में शराब पीने वाले 40 प्रतिशत तक लोगों में पहले से ही फैटी लिवर रोग से जुड़े दिखाई देने लगे हैं।
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दूसरी खराब आदत है रोजाना अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाना। अत्यधिक मात्रा में फ्रक्टोज, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और फैट से भरपूर चीजें फैटी लिवर रोग का खतरा पैदा करती हैं। युवाओं में ये समस्या तेजी से पनप रही है। डॉक्टर सेठी के अनुसार, 2000 के दशक की शुरुआत से बच्चों और युवा वयस्कों में फैटी लिवर रोग के मामलों में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, और उनका मानना ​​है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।
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लिवर का दुश्मन लंबे समय तक रहने वाला तनाव और खराब नींद भी है। डॉक्टर सेठी ने बताया कि लगातार अपर्याप्त नींद लेते हुए लंबे समय तक तनाव के साथ जीना लिवर के लिए ठीक नहीं है। ज्यादातर लोग इन दोनों को लिवर के डैमेज होने से नहीं जोड़ते हैं, लेकिन कोर्टिसोल का असंतुलन इंटरनल फैट स्टोरेज को बढ़ाता है। इससे फैटी लिवर का खतरा बढ़ता है। फैटी लिवर के मरीजों में स्वस्थ लोगों की तुलना में कोर्टिसोल का स्तर 65 प्रतिशत अधिक होता है जो सीधे तौर पर बीमारी की गंभीरता से जुड़ा है।