प्रदूषण की मार से बचना है तो रोज करें ये 5 योगासन

अनुलोम विलोम बहुत आसान योगाभ्यास है। लेकिन इसके फायदे अनमोल हैं। इसे करने से दिल की बीमारियों के साथ-साथ ब्लड प्रेशर की बीमारी में भी फायदा मिलता है। इसके लिए आसन पर बैठ जाएं और नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हुए बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते है। इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते है, तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं। इस क्रिया को पहले 3 मिनट तक करें और बाद में इसका अभ्यास 10 मिनट तक करें।
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अनुलोम विलोम बहुत आसान योगाभ्यास है। लेकिन इसके फायदे अनमोल हैं। इसे करने से दिल की बीमारियों के साथ-साथ ब्लड प्रेशर की बीमारी में भी फायदा मिलता है। इसके लिए आसन पर बैठ जाएं और नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हुए बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते है। इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते है, तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं। इस क्रिया को पहले 3 मिनट तक करें और बाद में इसका अभ्यास 10 मिनट तक करें।
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कपालभाति प्राणायाम प्रदूषण के फेफड़ों को बचाने में मदद करता है। इससे शरीर से मौजूद विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते है। साथ ही शरीर में एनर्जी और फेफड़े साफ होते हैं। किसी योगा मैट में पलथी मार कर बैठ जाएं। आंखे को बंद कर लें और सांस ध्यान लगाकर सांस की गति को अनुभव करें और अब इस क्रिया को शुरू करें। इसके लिए पेट के निचले हिस्से को अंदर की ओर खींचे और नाक से सांस बाहर फेंके। इससे खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़कर खून शुद्ध होने लगता है।
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इस प्राणायाम के अभ्यास से दमा, वात, कफ रोगों का नाश होता है। इसके लिए सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। आंखें बंद रखें। बाएं हाथ को बाएं घुटने पर ष्ज्ञान मुद्रा में रखें, फिर दाएं हाथ की अनामिका से बाएं नासिका के छिद्र को दबाकर बंद करें। फिर दाई नासिका से जोर से श्वास अन्दर लें। अपनी क्षमता अनुसार श्वास रोकने का प्रयास करें। फिर दाएं नासिका के छिद्र को बन्द कर बाएं नासिका छिद्र से श्वास निकाले। इस योगाभ्यास से प्रदूषण के असर को कम किया जा सकता
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बाह्य प्राणायाम को करने से ताजी सांस मिलेगी। इसके फेफड़ों से गंदी हवा बाहर निकल जाएंगी। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले सामान्य स्थिति में बैठकर गहरी सांस लें। अब पूरी सांस को तीन बार रोकते हुए बाहर छोड़ें। शरीर से हवा पुश करने के लिए अपने पेट और डायाफ्राम का इस्तेमाल करें। लेकिन, ध्यान रखें श्वांस छोड़ना आपके लिए किसी भी स्थिति में असहज न रहे। अपनी ठोडी को अपने सीने से स्पर्श करें और अपने पेट को पूरी तरह से अंदर और थोड़ा ऊपर की ओर खींच लें।अपनी क्षमता के हिसाब से इस स्थिति में बैठे रहें। फिर अपनी ठोडी धीरे से ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे में सांस लें। फेफड़ों को पूरी तरह से हवा से भर लें। तीन बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।
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नहवा को संस्कृत में प्राण कहते हैं। इसी आधार पर कम हवा से उच्चरित ध्वनि ‘अल्पप्राण’ और अधिक हवा से उतपन्न ध्वनि ‘महाप्राण’ कही जाती है। प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण है। इसमें विसर्ग की तरह ‘ह’ की ध्वनि सुनाई पड़ती है। सभी उष्म वर्ण महाप्राण हैं। ‘हम्म्म्म’ मंत्र का उच्चारण करते हुए गहरी और लंबी श्वास लें और बाहर छोड़ें। इस मंत्र का उच्चारण करते हुए दस से पंद्रह मिनट तक यह आसन करें।