वॉल सिट्स करने से कौन से फायदे मिलते हैं?

वॉल सिट एक आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज है जो लोअर बॉडी को मजबूत बनाती है। इस एक्सरसाइज़ को करने के लिए आपको किसी उपकरण, कपड़ों या जिम की मेंबरशिप की ज़रूरत नहीं है। रोजाना इस एक्सरसाइज़ को कर के आप अपनी लोअर बॉडी को मजबूत और लचीला बना सकते हैं।
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वॉल सिट एक आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज है जो लोअर बॉडी को मजबूत बनाती है। इस एक्सरसाइज़ को करने के लिए आपको किसी उपकरण, कपड़ों या जिम की मेंबरशिप की ज़रूरत नहीं है। रोजाना इस एक्सरसाइज़ को कर के आप अपनी लोअर बॉडी को मजबूत और लचीला बना सकते हैं।
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पैर बनते हैं मज़बूत: वॉल सिट जांघों, कूल्हों और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों पर काम करती है। इससे शरीर के निचले हिस्से की ताकत बढ़ती है। हालांकि, यह पैरों पर केंद्रित एक्सरसाइज़ है, लेकिन यह आपके कोर की मांसपेशियों को भी एक्टिव करती है।
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पोस्चर होता है बेहतर : वॉल सिट को करने से झुककर बैठने या खड़े होने की आदत को सुधारने में मदद मिलती है और शरीर को सीधा पोस्चर बनाए रखने की मदद मिलती है।
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बेहतर संतुलन: बिना कुर्सी के बैठे हुए पोज़िशन में संतुलन बनाने से सभी मसल्स एक साथ एक्टिव हो जाते हैं। शरीर का बैलेंस बना रहे इसलिए कोर और पैरों की मांसपेशियां मिलकर काम करती हैं, जिससे शरीर को अलग-अलग गतिविधियों में स्थिर रहने की ट्रेनिंग मिलती है। बेहतर संतुलन से गिरने का खतरा कम होता है।
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दीवार पर पीठ लगाकर खड़े हों। पैरों और कंधे के दूरी बराबर होनी चाहिए। पीठ को दीवार के सहारे नीचे तब तक लेकर जाएं जब तक घुटने और कूल्हे 90 डिग्री के एंगल पर न आ जाएं। यानी आपको ऐसे बैठने है जैसे आप कुर्सी पर बैठ रहे हैं। अब इस पोश्चर में 20 से 60 सेकंड तक रुकें और फिर धीरे-धीरे ऊपर उठें।