वृंदावन में किन लोगों को होली खेलने नहीं जाना चाहिए?

वृंदावन की होली दुनिया-भर में प्रसिद्ध है। यहां की फूलों वाली होली, लट्ठमार होली और मंदिरों की रंगोत्सव परंपरा लाखों लोगों को आकर्षित करती है। लेकिन यहां की भीड़, उत्साह और लंबे समय तक चलने वाले कार्यक्रम हर किसी के लिए अनुकूल नहीं होते। चलिए, जानते हैं किन लोगों को यहां होली खेलने नहीं जाना चाहिए?
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वृंदावन की होली दुनिया-भर में प्रसिद्ध है। यहां की फूलों वाली होली, लट्ठमार होली और मंदिरों की रंगोत्सव परंपरा लाखों लोगों को आकर्षित करती है। लेकिन यहां की भीड़, उत्साह और लंबे समय तक चलने वाले कार्यक्रम हर किसी के लिए अनुकूल नहीं होते। चलिए, जानते हैं किन लोगों को यहां होली खेलने नहीं जाना चाहिए?
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क्लॉस्ट्रोफोबिया से पीड़ित: अगर आपको क्लॉस्ट्रोफोबिया या भीड़ में असहजता होती है, तो यहां का माहौल तनाव बढ़ा सकता है। साथ ही हार्ट, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर या सांस की समस्या वाले लोग को भी भारी भीड़ और रंग-गुलाल के धुएं में जाने से बचना चाहिए।
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छोटे बच्चे और बुज़ुर्ग: वृंदावन की होली में छोटे बच्चे और बुज़ुर्ग लोगों को जाने से बचना चाहिए। क्योंकि बहुत भीड़, तेज़ धक्का-मुक्की और शोरगुल उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को लंबे समय तक खड़े रहना, धक्का-मुक्की और तेज़ आवाज़ें थकान व असुविधा बढ़ा सकती हैं।
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एलर्जी से पीड़ित: होली पर केमिकल युक्त रंग एलर्जी वाले लोगों के लिए खतरा बन सकता है। इनमें मौजूद पारालेड और सिलिका जैसी धातुएं त्वचा में जलन सूजन, आंखो में लालिमा और सांस संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं। इनसे बचने के लिए हर्बल रंगों का उपयोग करें और त्वचा व आंखों की सुरक्षा के लिए तेल या क्रीम लगाएं।
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क्या सावधानी रखें: अगर इसके बाद भी आप होली खेलने वृंदावन जाना चाहते हैं तो हल्के, पूरे बाजू के कपड़े और चश्मा पहनें। केमिकल रंगों से बचें, फूलों/ऑर्गेनिक रंगों को प्राथमिकता दें। भीड़ वाले मुख्य कार्यक्रमों में न जाएं। अपने साथ पानी,और दवाइयां साथ में रखें।