भाद्रपद अमावस्या के दिन इन जगहों पर जलाएं दीया, घर पर बनी रहेगी पितरों की कृपा

अगर आप पितरों की कृपा पाना चाहते हैं तो अमावस्या के दिन इन स्थानों पर दीया जरूर जलाएं। धार्मिक मान्यता है कि इन जगहों पर दीया जलाने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या है। इस दिन गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान-दान करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा अमावस्या के दिन पितरों का पिंडदान, श्राद्ध और पिंडदान करने का भी विधान है। अमावस्या का दिन पितृ पूजन के लिए अति उत्तम माना जाता है।
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11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या है। इस दिन गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान-दान करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा अमावस्या के दिन पितरों का पिंडदान, श्राद्ध और पिंडदान करने का भी विधान है। अमावस्या का दिन पितृ पूजन के लिए अति उत्तम माना जाता है।
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धार्मिक मान्यका है कि अमावस्या के दिन दीपदान करने से पितृ दोष दूर होता है और साथ ही घर में सुख-समृद्धि भी आती है। तो आइए जानते हैं कि पितरों की कृपा पाने के लिए अमावस्या के दिन किन जगहों पर दीया जलाएं।
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हिंदू धर्म में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। ऐसे में अमावस्या के दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में पितरों का नाम का दीया जलाएं।
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अमावस्या के दिन शाम के समय पीपल पेड़ के नीचे एक सरसों तेल का दीया जलाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल में त्रिदेवों के साथ-साथ पितरों का वास होता है।
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अमावस्या के दिन शाम के समय घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर चौमुखी दीपक जलाएं। इससे अकाल मृत्यु का भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।