सामुद्रिक शास्त्र: कनिष्ठिका उंगली से जानें व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और स्वभाव

सामुद्रिक शास्त्र में हाथ की सबसे छोटी उंगली यानी कनिष्ठिका उंगलीका बहुत महत्व माना गया है। इसे बुध की उंगली भी कहते हैं। ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति और व्यापार का कारक ग्रह माना जाता है।

सामुद्रिक शास्त्र में आज हम बात करेंगे कनिष्ठिका उंगली के बारे में। कनिष्ठिका उंगली को बुध की उंगली भी कहा जाता है क्योंकि इसके नीचे बुध ग्रह का स्थान माना जाता है। इस उंगली के जरिये व्यक्ति की वाकपटुता, ज्ञान, बुद्धि और चातुर्य, यानि चतुरता का पता चलता है।
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सामुद्रिक शास्त्र में आज हम बात करेंगे कनिष्ठिका उंगली के बारे में। कनिष्ठिका उंगली को बुध की उंगली भी कहा जाता है क्योंकि इसके नीचे बुध ग्रह का स्थान माना जाता है। इस उंगली के जरिये व्यक्ति की वाकपटुता, ज्ञान, बुद्धि और चातुर्य, यानि चतुरता का पता चलता है।
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अगर कनिष्ठिका उंगली की ऊंचाई अनामिका उंगली के ऊपरी व प्रथम भाग के अंत तक हो तो यह सामान्य मानी जाती है। यदि यह सामान्य से अधिक लंबी होती है तो व्यक्ति में अभिव्यक्ति की अद्भुत क्षमता होती है। उनका आई-क्यू लेवल सामान्य से अधिक होता है और ये लोग अच्छे लेखक के साथ-साथ अच्छे वक्ता भी साबित होते हैं।
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लेकिन जिस व्यक्ति की कनिष्ठिका सामान्य से छोटी होती है उसमें अभिव्यक्ति की क्षमता की कमी होती है। इनका अपनी भावनाओं और शब्दों पर नियंत्रण नहीं होता है। इनका व्यवहार बिल्कुल बच्चों जैसा होता है।
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इसके अलावा अगर किसी की कनिष्ठिका उंगली का निचला भाग मोटा हो तो वह व्यक्ति विलासिता पूर्ण और आरामदायक जीवन जीना पसंद करता है।