गुजरात के वरिष्ठ आदिवासी नेता और 10 बार विधायक रहे मोहनसिंह राठवा का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने 82 वर्ष की उम्र में अपने पैतृक गांव उमरवा में अंतिम सांस ली। उनके परिवार ने मौत की जानकारी दी। पिछले चार वर्षों से उनका स्वास्थ्य लगातार खराब था, जिसके कारण उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी। पीएम मोदी ने मोहनसिंह के निधन पर दुख जताते हुए अपने पुराने दिनों को याद किया।
पीएम मोदी ने लिखा, "गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री मोहन सिंह राठवा के निधन की खबर से मुझे बहुत दुख हुआ। मुझे गुजरात विधानसभा में उनके साथ सालों तक काम करने का मौका मिला। आदिवासी समुदाय के हर तरह के विकास, जनसेवा और लोगों की भलाई के लिए उनका समर्पण और योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। मैं प्रार्थना करता हूं कि भगवान दिवंगत आत्मा को शांति दें और उनके दुखी परिवार वालों को यह दुख सहने की ताकत दें। ओम शांति…!!"
बेटे ने एक्स पर दी जानकारी
मोहनसिंह के बेटे राजेंद्रसिंह राठवा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''मोहनसिंह राठवा केवल एक नेता ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले मजबूत नेता थे। जमीन से जुड़े इस नेता ने लंबे समय से अस्वस्थता के कारण सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी और बीमारी से जूझते हुए आज उन्होंने अंतिम सांस ली। जनसेवा को जीवन का ध्येय बनाने वाले मेरे पूज्य पिता के निधन से हमारे परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है। सामाजिक सेवा, जनकल्याण और मानवीय मूल्यों के लिए उन्होंने जीवनभर जो कार्य किए, वे हमेशा हमें प्रेरित करते रहेंगे। ओम शांति।''
1965 में सरपंच बने थे राठवा
राठवा के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1965 में सरपंच चुने जाने से हुई। इसके बाद उन्होंने 1972 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पावी-जेतपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। बाद में वह कुछ समय के लिए जनता पार्टी और जनता दल में भी रहे तथा दोनों दलों के टिकट पर विधायक चुने गए। वर्ष 1998 में उन्होंने फिर कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता। अपने विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई के पानी की समस्या के समाधान के लिए उन्हें विशेष रूप से याद किया जाता है। 'सुखी सिंचाई योजना' का श्रेय भी व्यापक रूप से उन्हें ही दिया जाता है।
10 बार विधायक बने राठवा
राठवा गुजरात के सबसे वरिष्ठ और लोकप्रिय आदिवासी नेताओं में गिने जाते थे। वह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित छोटा उदयपुर और पावी-जेतपुर विधानसभा सीटों से कुल 10 बार विधायक चुने गए। वर्ष 1990 से 1995 तक वह कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में केवल एक बार 2002 में विधानसभा चुनाव हारा, जब चुनाव गोधरा दंगों की पृष्ठभूमि में हुए थे, तब वह भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार से पराजित हुए। इसके बाद उन्होंने अगला चुनाव जीत लिया, लेकिन उनकी जीत का अंतर लगातार कम होता गया। वर्ष 2012 में उन्होंने भाजपा के गुलाबसिंह राठवा को करीब 2,500 मतों से हराया, जबकि 2017 में भाजपा के अर्जुन राठवा को लगभग 1,000 मतों के अंतर से पराजित किया।
2022 में बीजेपी में शामिल हुए
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले मोहनसिंह राठवा अपने पुत्र राजेंद्रसिंह राठवा के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे। उसी वर्ष राजेंद्रसिंह छोटा उदयपुर विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। राज्य के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने राठवा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, ''जनसेवा, जनकल्याण और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित उनका जीवन हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। गुजरात विधानसभा में उनके साथ काम करने का अवसर मिलना मेरे लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।'' गुजरात भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने कहा कि जनसेवा के प्रति मोहनसिंह राठवा की अटूट निष्ठा, आदिवासी समाज के उत्थान के लिए उनके प्रयास और जनकल्याण में उनका अमूल्य योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
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