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गुजरात: एक NRI की हत्या और 84 गवाहों के बयान, कोर्ट ने 10 लोगों को सुनाई खौफनाक सजा, जानिए पूरा मामला

एनआरआई युवक की हत्या का मामला साल 2006 का है। कोर्ट ने 19 साल बाद अब जाकर 10 दोषियों को खौफनाक सजा सुनाई है। कोर्ट ने 84 लोगों के बयान सुनने के बाद दोषियों को कड़ी सजा दी है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO सांकेतिक तस्वीर

अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने 2006 में एक प्रवासी भारतीय (NRI) की हत्या के लिए 10 लोगों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एनआरआई ने एक आध्यात्मिक संगठन के लिए जुटाए गए विदेशी धन का लेखा-जोखा मांगा था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भरत जाधव ने शुक्रवार को 84 गवाहों के बयानों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आध्यात्मिक संगठन ‘स्वाध्याय परिवार’ के सदस्यों को हत्या एवं आपराधिक षड्यंत्र रचने समेत अन्य आरोपों में दोषी पाया। 

पीट-पीटकर की गई हत्या

स्वाध्याय परिवार से जुड़े एनआरआई पंकज त्रिवेदी की 15 जून 2006 को शहर के एलिसब्रिज जिमखाना के पास पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, त्रिवेदी ने 2001 में भुज भूकंप राहत के लिए संगठन को विदेश से धन जुटाने में मदद की थी। लेकिन, जब उन्होंने इस धन के व्यय के बारे में पूछताछ की, तो संगठन के सदस्यों ने उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज करा दीं। 

कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

अभियोजन पक्ष ने कहा कि त्रिवेदी ने खतरा महसूस होने पर पुलिस से संपर्क किया और उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर संगठन के 30 सदस्यों के नाम बताए और कहा कि अगर उन्हें या उनके मित्रों को कुछ भी हुआ तो वे इसके लिए जिम्मेदार होंगे। आरोपियों ने त्रिवेदी के खिलाफ निचली अदालतों, गुजरात उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उनके खिलाफ मामले खारिज कर दिए गए। 

इन दोषियों को सुनाई गई कारावास की सजा

अभियोजन पक्ष ने कहा कि कानूनी झटके के बाद आरोपी, त्रिवेदी की हत्या करने का मौका तलाश रहे थे। अदालत ने मामले में चंद्रसिंह जडेजा, हितेशसिंह चुडासमा, दक्षेश शाह, भूपतसिंह जडेजा, मानसिंह वाढेर, घनश्याम चुडासमा, भरत भट्ट, भरतसिंह जडेजा, चंद्रकांत डाकी और जसुभा जडेजा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 

न्यायालय ने मुकदमे के दौरान 23 गवाहों के मुकर जाने पर भी सख्त रुख अपनाया और उन्हें दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 344 के तहत झूठी गवाही के लिए नोटिस जारी किया। (भाषा के इनपुट के साथ)