गुजरात के वडोदरा के एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर की बेटी हिमानी हिरानी ने तुर्की में हुई एक इंटरनेशनल रेसलिंग प्रतियोगिता में अंडर-71 kg कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने फाइनल में अपनी रूसी प्रतिद्वंद्वी को हराया। उनकी जीत की तुलना फिल्म 'दंगल' की असल जिंदगी की प्रेरणा से की जा रही है, जो यह दिखाती है कि खेल कैसे बहुत साधारण बैकग्राउंड से आने वाले लोगों की लाइफ को बदल सकता हैं।
'दंगल' देख हिमानी हिरानी बनीं कुश्ती चैंपियन
हिमानी एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता प्रकाशभाई ऑटो रिक्शा चलाते हैं और उनकी मां मीनाबेन हाउसवाइफ हैं। हिमानी और उनकी बहन मेघा दोनों ने अपने माता-पिता के हिट फिल्म 'दंगल' देखने के बाद रेसलिंग को अपने करियर के तौर पर चुना। इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक पिता अपनी बेटियों को चैंपियन रेसलर बनने के लिए ट्रेनिंग देता है। इस कहानी से प्रेरित होकर प्रकाशभाई और मीनाबेन ने अपनी बेटियों के सपने का समर्थन किया और दोनों बहनों ने वडोदरा के सलातवाड़ा में नारायण गुरु अखाड़े में ट्रेनिंग शुरू कर दी।
ऑटो चालक की बेटी हिमानी हिरानी ने जीता गोल्ड
लगातार प्रैक्टिस और अनुशासित ट्रेनिंग से हिमानी ने हाई लेवल पर मुकाबला करने के लिए जरूरी ताकत और तकनीक हासिल की। तुर्की में हुई इंटरनेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने अंडर-71 kg वेट कैटेगरी में आगे बढ़ते हुए फाइनल में जगह बनाई, जहां उनका मुकाबला एक रूसी रेसलर से हुआ। एक निर्णायक मुकाबले में हिमानी ने अपनी विरोधी को पिन करके गोल्ड मेडल जीता। यह जीत उनके जबरदस्त कंट्रोल और आत्मविश्वास को दिखाती है।
वडोदरा में हिमानी हिरानी का हुआ भव्य स्वागत
वडोदरा लौटने पर रेलवे स्टेशन पर हिमानी का जोरदार स्वागत किया गया, जहां परिवार वालों, कोच और साथी रेसलरों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। गले में गोल्ड मेडल पहने हुए उन्हें देखकर उनके माता-पिता भावुक हो गए। अब हिमानी की नजर नवंबर 2026 में USA में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने पर है, ताकि वह तुर्की में मिली जीत को आगे बढ़ा सकें और इंटरनेशनल रेसलिंग में अपनी कामयाबी का सफर जारी रख सकें।
(सत्यम नेवास्कर- स्ट्रिंगर)
ये भी पढ़ें - कुश्ती 'पहलवानों' और 'हु्ड्डा' को लेकर ये क्या बोल गए बृजभूषण शरण सिंह! महाभारत की 'द्रौपदी' से कर दी तुलना