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गुजरात में प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी RTI के दायरे में, सरकार को GIC ने दिए ये निर्देश

गुजरात सूचना आयोग ने प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को RTI कानून के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' मानते हुए गुजरात सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। पारुल यूनिवर्सिटी को भी RTI की जानकारी उपलब्ध कराने का आदेश मिला है।

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Image Source : PTI REPRESENTATIONAL गुजरात की पारुल यूनिवर्सिटी से RTI के तहत कुछ जानकारी मांगी गई थी।

अहमदाबाद: गुजरात इन्फॉर्मेशन कमीशन (GIC) ने एक अहम फैसले में कहा है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटीज भी 'पब्लिक अथॉरिटी' हैं और सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत आती हैं। कमीशन ने गुजरात सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह गुजरात प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट 2009 के तहत बनी सभी यूनिवर्सिटीज़ में RTI कानून को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाए। यह फैसला प्रोफेसर देवदत्त राणा की अपील पर आया, जिन्होंने वडोदरा की पारुल यूनिवर्सिटी से RTI के तहत कुछ जानकारी मांगी थी। पारुल यूनिवर्सिटी ने यह कहकर जानकारी देने से इनकार कर दिया था कि वह एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है और उसे सरकार से कोई फंड नहीं मिलता, इसलिए वह RTI के दायरे में नहीं आती।

राणा की दलील को कमीशन ने सही ठहराया

प्रोफेसर राणा ने इस पर दलील दी कि चूंकि यूनिवर्सिटी गुजरात विधानसभा द्वारा पास किए गए एक्ट के तहत बनी है, इसलिए यह RTI कानून की परिभाषा के अनुसार 'पब्लिक अथॉरिटी' है। गुजरात इन्फॉर्मेशन कमीशन, जिसकी अध्यक्षता चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर डॉ. सुभाष सोनी कर रहे थे, ने राणा की दलील को सही ठहराया। कमीशन ने RTI एक्ट की धारा 2 का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी संस्था, जो संसद या राज्य विधानसभा के कानून से बनी हो, वह 'पब्लिक अथॉरिटी' कहलाती है। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) की वेबसाइट के अनुसार भी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज RTI के दायरे में आती हैं।

यूनिवर्सिटी को कमीशन ने दिए ये निर्देश

UGC के दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि संसद, राज्य विधानसभा या सरकार की अधिसूचना से बनी सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेज 'पब्लिक अथॉरिटी' के तहत आते हैं।  कमीशन ने 2020 में गुजरात शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक पत्र का भी जिक्र किया, जिसमें निजी विश्वविद्यालयों को RTI लागू करने की बात कही गई थी। GIC ने पारुल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को आदेश दिया कि वह RTI कानून को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाए। यूनिवर्सिटी को पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (PIO) और फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी नियुक्त करने और उनकी जानकारी वेबसाइट पर डालने को कहा गया है। साथ ही, यूनिवर्सिटी को प्रोफेसर राणा द्वारा मांगी गई जानकारी, खासकर इसके ऑफ-कैंपस सेंटरों के बारे में, उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

सरकार से कमीशन ने की ये सिफारिश

कमीशन ने गुजरात सरकार से सिफारिश की है कि वह गुजरात प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2009 के तहत बनी सभी यूनिवर्सिटीज में RTI कानून को लागू करने के लिए जरूरी आदेश जारी करे। इस फैसले से निजी विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है, और आम लोग इन संस्थानों से आसानी से जानकारी हासिल कर सकेंगे। यह फैसला न केवल पारुल यूनिवर्सिटी के लिए, बल्कि गुजरात की सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के लिए एक मिसाल बनेगा। इससे शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और खुलेपन को बढ़ावा मिलेगा। (PTI)