गांधीनगर: गुजरात कांग्रेस के नेता और विधायक जिग्नेश मेवाणी की मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। उनके खिलाफ गांधीनगर के पेथापुर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
- धारा 189(2) – गैर-कानूनी रूप से भीड़ के लिए सज़ा
- धारा 190 – समान उद्देश्य के लिए सामूहिक दायित्व
- धारा 191(2) – दंगा करने के लिए सज़ा
- धारा 221 – सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालना
- धारा 351(2) – आपराधिक धमकी के लिए सज़ा
- धारा 352 – शांति भंग करने के इरादे से जान-बूझकर अपमान करना
- धारा 353(1)(b): जनता में डर या घबराहट पैदा करने के इरादे से अफ़वाहें या झूठे बयान फैलाने पर केंद्रित है।
- धारा 353(1)(c): किसी वर्ग या समुदाय को दूसरे वर्ग या समुदाय के ख़िलाफ़ अपराध करने के लिए उकसाने के इरादे से झूठी जानकारी फैलाने पर केंद्रित है।
- धारा 353(2): अलग-अलग धार्मिक, नस्लीय, भाषाई, क्षेत्रीय या जातीय समूहों के बीच इन्हीं आधारों पर दुश्मनी, नफ़रत या दुर्भावना पैदा करने या उसे बढ़ावा देने पर सज़ा का प्रावधान है।
FIR में क्या कहा गया?
FIR के अनुसार, 9 OCT को गांधीनगर में चुनाव प्रचार के दौरान जब पेथापुर पुलिस स्टेशन में पुलिस, कांग्रेस के उम्मीदवार के खिलाफ मिली अर्जी पर उनका बयान दर्ज कर रही थी तब जिग्नेश अपने समर्थकों के साथ पेथापुर पुलिस स्टेशन पहुंचे और न सिर्फ पुलिस के काम में खलल डाली बल्कि आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए, बिना तथ्यों के भड़काऊ बयान दिए।
FIR के अनुसार, ऐसे बयान जिनसे समाज में वैमनस्य पैदा हो और साथ ही उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिये इन बयानों को ऐम्प्लिफाई भी किया ताकि समाज को गुमराह किया जा सके।
बता दें कि पिछले काफी समय से जिग्नेश अपने भड़काऊ बयानो से विवादों में चल रहे हैं पर पहली बार जिग्नेश पर कोई कानूनी कार्रवाई की गयी है।
इससे पहले खबर सामने आई थी कि वंदे मातरम के अपमान मामले में कांग्रेस विधायक की मुश्किलें बढ़ीं। स्पीकर ने विशेषाधिकार समिति को जांच के आदेश दिए। मामला कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला से जुड़ा है। उनके खिलाफ गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने विशेषाधिकार समिति को मामले की सख्त जांच के आदेश दिए थे।
ये भी पढ़ें-