नई दिल्ली: राजधानी में दक्षिणी दिल्ली के एक जाने-माने स्कूल रेयान इंटरनेशनल में पढ़ने वाले एक छह साल के बच्चे की मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। दिव्यांश की मौत पर जहां स्कूल प्रशासन सवालों की गुत्थी सुलझाने में परेशान है वहीं एक मां का अपने लाडले की याद में बुरा हाल है। शुरुआती तौर पर इस मामले में स्कूल प्रशासन की लापरवाही की सामने आ रही है। जिस स्कूल में रेयान पढ़ता था उसी स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे की मां ने एक ऐसी भावुक कविता लिखी है जो आपको अंदर तक झकझोर देगी। इस कविता में एक मां का दर्द झलकता है एक ऐसा दर्द जिसके जिम्मेवार वो स्कूल वाले हैं जहां पर उसकी मां उसे हर रोज तैयार कर पढ़ने भेजती थी।
कविता..
काश.. आज तू मेरे पास होता
चांद वहीं है, तारे वहीं हैं
तेरे बिस्तर पर तेरी मां वहीं है
पापा वहीं हैं...
तकिया वहीं है, चादर वहीं है
पर, मेरे साथ आज मेरे 'लाल' तू नहीं है
तेरे खिलौने देखूं..
तेरी कार देखूं..
पर मेरे चांद, तेरा चेहरा कैसे देखूं..
छूता था कल तक इन सबको
कल तक अपने हाथों से..
यही सोच आज इन्हें गले लगा रही हूं
आंखें बंद करूं तो तू दिखे
आंखें खोलूं तो ओझल हो जाए
एक बार तूने जाते वक्त
'मां' पुकारा तो होगा
काश.. मैं तेरे साथ होती
काश.. आज तू मेरे पास होता
काश..काश..काश..
- मां
चांद वहीं है, तारे वहीं हैं
तेरे बिस्तर पर तेरी मां वहीं है
पापा वहीं हैं...
तकिया वहीं है, चादर वहीं है
पर, मेरे साथ आज मेरे 'लाल' तू नहीं है
तेरे खिलौने देखूं..
तेरी कार देखूं..
पर मेरे चांद, तेरा चेहरा कैसे देखूं..
छूता था कल तक इन सबको
कल तक अपने हाथों से..
यही सोच आज इन्हें गले लगा रही हूं
आंखें बंद करूं तो तू दिखे
आंखें खोलूं तो ओझल हो जाए
एक बार तूने जाते वक्त
'मां' पुकारा तो होगा
काश.. मैं तेरे साथ होती
काश.. आज तू मेरे पास होता
काश..काश..काश..
- मां
यह एक मां की चिट्ठी है, उस बदनसीब मां के नाम जिसका लाडला अनजाने में इस दुनिया को अलविदा कह गया। यह चिट्ठी दर्द के रिश्ते का सबूत है। एक ऐसा रिश्ता जो मातम की घड़ी में दो माओं के बीच खुद-ब-खुद बन गया। एक मां पर कयामत गुजरी तो दूसरी मां ने भावनाओं को कागज पर उकेर दिया। यकीन मानिए यह कविता नहीं है यह क्रुंदन है, करुणा है, चीत्कार है एक मां की।
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