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बिहार चुनाव में हार के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम, FDI के लिए खोले 15 नए सेक्‍टर

नई दिल्‍ली: बिहार विधानसभा चुनावों में करारी हार से एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक एलाइंस) की साख को नुकसान से उबारने के लिए मोदी सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कंस्‍ट्रक्‍शन, डिफेंस,

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सरकार का बड़ा फैसला, FDI के लिए खोले 15 नए सेक्टर

नई दिल्‍ली: बिहार विधानसभा चुनावों में करारी हार से एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक एलाइंस) की साख को नुकसान से उबारने के लिए मोदी सरकार ने मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कंस्‍ट्रक्‍शन, डिफेंस, रिटेल और प्‍लांटेशन समेत 15 सेक्‍टर में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश (FDI) की प्रक्रिया को आसान बनाने की घोषणा की है। सरकार अपने इस कदम से देश में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश को बढ़ाना चाहती है। सरकार ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को यूके और टर्की की यात्रा पर रवाना होने वाले हैं। वे वहां जी-20 की बैठक में हिस्‍सा लेने जा रहे हैं। इसके अलावा सरकार अपने इस फैसले से यह भी बताना चाहती है कि बिहार विधानसभा चुनावों में मिली हार से देश को आगे ले जाने की एनडीए की योजना पर कोई असर नहीं पड़ा है।

बिहार परिणामों के बाद एनडीए के आर्थिक एजेंडा के सुस्‍त पड़ने की बातें कहीं जा रही थीं, ऐसे में सरकार ने यह बड़ा फैसला कर विपक्ष को साफ संकेत दिया है कि सरकार अपने विकास एजेंडा को लेकर प्रतिबद्ध है। विपक्ष ने पीएम मोदी की आलोचना करते हुए कहा था कि बिहार चुनाव प्रचार के दौरान एनडीए अपने विकास क मुद्दों से भटक गई है।

सरकार के फैसलें

-निर्माण, रीयल एस्‍टेट, डिफेंस, ब्रॉडकास्‍ट, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप कंपनियों (एएलपी) में एफडीआई नीति में ढील।
-रबड़, कॉफी, इलायची, पाम आयल व जैतून की बागवानी में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति।
-सिंगल ब्रांड रिटेल कारोबार में एफडीआई नीति में ढील।
-कंपनियों को ई-कॉमर्स के जरिये उत्पाद बेचने की अनुमति।
-क्षेत्रीय विमानन सेवाओं में ऑटोमैटिक रूट से 49 फीसदी विदेशी निवेश की अनुमति।

निवेशकों का बचेगा समय

सरकार ने अपने बयान में कहा है कि इन सुधारों से देश में विदेशी निवेश की प्रक्रिया को और आसान, युक्तिसंगत और सरल बनाया गया है, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा एफडीआई प्रस्‍ताव गवर्नमेंट रूट के बजाये ऑटोमैटिक रूट से आएं, जिससे निवेशकों की एनर्जी और समय दोनों की बचत होगी। इन एफडीआई सुधारों से कृषि, पशुपालन, प्‍लांटेशन, डिफेंस, ब्रॉडकास्टिंग, सिविल एविएशन और मैन्‍यूफैक्‍चरिंग जैसे सेक्‍टर को फायदा होगा। बयान में कहा गया है कि सरकार के इस कदम से मेक इन इंडिया को प्रोत्‍साहन मिलेगा और उपभोक्‍ता अन्‍य देशों से आयात के बदले देश में बने उत्‍पाद ही खरीदेंगे।

एफआईपीबी की सीमा भी बढ़ी

प्रस्‍तावित सुधारों में फॉरेन इन्‍वेस्‍टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की सीमा भी 3000 करोड़ से बढ़ाकर 5000 करोड़ रुपए की गई है। अब एफआईपीबी 5000 करोड़ रुपए के एफडीआई प्रस्‍तावों को मंजूरी दे सकता है, इससे पहले यह सीमा 3000 करोड़ रुपए थी। इससे ज्‍यादा के एफडीआई प्रस्‍तावों पर केंद्रीय कैबिनेट विचार करती थी और मंजूरी देती थी। अब 5000 करोड़ रुपए से अधिक के एफडीआई प्रस्‍तावों पर ही कैबिनेट विचार करेगी।

अप्रैल-जून में 19.39 अरब डॉलर का एफडीआई

भारत में अप्रैल-जून 2015 तिमाही में 19.39 अरब डॉलर का एफडीआई आया है, जो कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 29.5 फीसदी ज्‍यादा है। सरकार ने देश में विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए रेलवे, मेडिकल डिवाइस, इंश्‍योरेंस, पेंशन, कंस्‍ट्रक्‍शन और डिफेंस जैसे सेक्‍टरों एफडीआई के लिए पहले ही खोल दिया है।

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