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अरुण जेटली और डीडीसीए विवाद: वो सब कुछ जो आप जानना चाहेंगे

डीडीसीए में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली और डीडीसीए विवाद: वो सब कुछ जो जेटली पर गंभीर आरोप लगाए थे, वहीं आज वित्त मंत्री ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए केजरीवाल समेत आप के कुछ नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा ठोका है।

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नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने बीते दिनों एक प्रेस कांफ्रेंस करके डीडीसीए में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली पर गंभीर आरोप लगाए थे, वहीं आज वित्त मंत्री ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए केजरीवाल समेत आप के कुछ नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा ठोका है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली से जुड़ा यह पूरा विवाद दरअसल है क्या यह बात आज हम आपको अपनी खबर के जरिए बताने की कोशिश करेंगे।

सबसे पहले जानिए डीडीसीए है क्या?: दरअसल डीडीसीए एक इकाई है जो दिल्ली और उसके आसपास के जिलों में क्रिकेट को प्रोत्साहन देने के साथ साथ टी-20 जैसे क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन करता है। यह देश की अन्य क्रिकेट बॉडी के जैसी नहीं है लेकिन एक प्राइवेट लिमटेड कंपनी है। इसके 4,600 सदस्यों में से करीब 300 कार्पोरेट लोग हैं।

क्या है आरोप- डीडीसीए के काफी सारे सदस्य जिसमें पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी और कीर्ति आजाद, जो कि दरभंगा (बिहार) से भाजपा सांसद हैं ने आरोप लगाया कि एसोसिएशन के संचालन में काफी सारी अनियमितताएं सामने आईं और कई बार कुप्रबंधन की स्थिति भी सामने आई। 28 सितंबर 2012 को कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने एन सी बख्शी की शिकायत के आधार पर जांच शुरु की। अपनी जांच में SFIO ने पाया कि साल 2006 से 2012 के बीच डीडीसीए में कथित वित्तीय अनियमितता के 23 उदाहरण मिले। इसमे धन की हेराफेरी, करों का भुगतान न करना, निविदा प्रक्रिया के नियमों का पालन न करना, भ्रष्ट ऑडिटर की भर्ती करना, सदस्यता के प्रबंधन में भी अनियमितता बरतना, साथ ही टिकट और अन्य चीजों में गड़बड़ियां।   

फिरोज शाह कोटला स्टेडियम: दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के निर्माण और नवीनीकरण में SFIO ने पाया कि इस सारी प्रक्रिया में कानून की अपेक्षा की गई। एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस जमीन पर यह स्टेडियम बना है उस पर दिल्ली डिवेलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) का मालिकाना हक रखती थी। डीडीसीए की लीज साल 2002 में खत्म हो रही है। यह जानकारी होने के बावजूद डीडीसीए ने इसका नवीनीकरण करवाया। जब केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने स्टेडियम का निरीक्षण किया तो उन्होंने स्टेडियम के भीतर करीब 13 स्थानों पर अनाधिकृत निर्माण पाया। मई 2015 में स्टेडियम के पास किसी भी तरह के पर्याप्त सुरक्षा मानक नहीं थे, दूरगामी परिणामों के लिहाज से सुरक्षा मानक काफी अहमियत रखते हैं। स्टेडियम में करीब 40,000 लोगों के बैठने की क्षमता है।    

एज वॉयलेशन (Age violations): एक निजी पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक उम्र संबंधी नियमों का पालन डीडीसीए ने नहीं किया। दिल्ली में एक कोचिंग अकादमी चलाने वाले सुरिंदर खन्ना के एक कोट का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि यहां पर 16 साल का लड़का अंडर 14 में खेलता है और 19 साल का लड़का अंडर 19 में , वहीं 23 साल का लड़के अंडर 19 टूर्नामेंट में खेलते हैं।

चुनाव: एक निजी दैनिक अंग्रेजी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक डीडीसीए के 4,294 सदस्यों के वोट को सिर्फ 5 लोग नियंत्रित करते हैं और यह कंपनी एक्ट की धारा 150 का उल्लंघन है।

दिल्ली सरकार की जांच के लिए क्या किया?": दिल्ली सरकार ने 12 नवंबर को इस मामले की जांच करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।

इस पूरे विवाद का अरुण जेटली से नाता- अरुण जेटली साल 1999 से 2012 तक डीडीसीए के अध्यक्ष थे। उन्होंने किसी भी प्रकार की गड़बड़ से इनकार किया है। डीडीसीए के मौजूदा अध्यक्ष चेतन चौहान ने बताया कि जेटली ने एसोसिएशन के दिन प्रतिदिन के कामकाज में अपना कोई दखल नहीं दिया था। एक मीडिया कांफ्रेंस में इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए चौहान ने कहा कि जेटली ने फिरोज शाह कोटला मैदान के वैश्विक स्तर की सुविधाओं से लैस किया है।

(साभार: thenewsminute.com)

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