नयी दिल्ली: देश के 10 प्रमुख केंद्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा आज आहूत एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से बैंकिंग और परिवहन जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हुई हैं। गौरतलब है कि श्रमिक संगठनों ने सरकार द्वारा श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी बदलावों और बेहतर मजदूरी की उनकी मांग पर उदासीनता के चलते इस हड़ताल का आह्वान किया है। सीटू के महासचिव तपन कुमार सेन ने पीटीआई-भाषा से कहा, हड़ताल शुरू हो गई है। हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। इस बारे में अधिक जानकारी थोड़ी देर में आने लगेगी। भेल के तिरचिरापल्ली संयंत्र में सुबह की पाली में करीब 90 प्रतिशत श्रमिक काम पर नहीं आए। मजदूर नेता ने कहा, विशाखापत्तनम का इस्पात संयंत्र 100 प्रतिशत बंद है। कुछ स्थानों पर रेल रोको अभियान भी चलाया गया है। यह एक सफल हड़ताल होगी क्योंकि 15 करोड़ श्रमिक सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने उतरेंगे।
पिछले साल भी इन दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने हड़ताल का आह्वान किया था जिसमें करीब 15 करोड़ श्रमिकों ने प्रतिभाग किया था। सेन ने कहा, गुड़गांव औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह से बंद है और पुलिस ने तकरीबन 12 लोगों को मानेसर क्षेत्र में गिरफ्तार किया है। ये सभी सूचनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि इस बार की हड़ताल बड़ी होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थन वाले भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर अन्य सभी बड़े श्रमिक संगठन इस हड़ताल में शामिल हुए हैं। संगठनों ने सरकार द्वारा उनकी मांगों पर विचार करने के आश्वासन और हाल में दो साल के बोनस की घोषणा एवं मेहनताने में बढ़ोत्तरी को पूरी तरह अपर्याप्त बताया।
हड़ताल को लेकर सरकार ने सभी मंत्रालयों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सार्वजनिक सुविधाओं और आवश्यक सेवाएं प्रभावित नहीं हों। सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों से कहा गया है कि उनके मातहत आने वाले सभी सेवाओं के सुचारू रूप से चलने के लिए जरूरी औश्र प्रभावी कदम उठाएं। कल पत्रकारों से चर्चा करते हुए श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने श्रमिकों को पेश समस्याओं के लिए पूर्ववर्ती संप्रग सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि वर्तमान सरकार श्रमिक संगठनों के साथ किसी तरह का द्वंद्व नहीं करना चाहती और उसके उनके समर्थन और सहयोग की जरूरत है।
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