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जवाहर बाग पर दो साल तक कब्जा क्यों रहने दिया गया: Allahabad HC

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि मथुरा के जवाहर बाग में दो साल से अधिक समय तक अतिक्रमणकारियों का कब्जा क्यों रहने दिया गया।

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- India TV Hindi
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इलाहाबाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि मथुरा के जवाहर बाग में दो साल से अधिक समय तक अतिक्रमणकारियों का कब्जा क्यों रहने दिया गया जबकि 2014 में इस सार्वजनिक पार्क का इस्तेमाल केवल दो दिन तक प्रदर्शन के लिए करने की अनुमति दी गयी थी। जवाहर बाग मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति रवींद्रनाथ कक्कड़ की खंडपीठ ने वहां अतिक्रमण और उससे संबंधित कार्रवाई को लेकर मथुरा के जिला प्रशासन और राज्य सरकार के बीच हुए संवाद का ब्योरा भी मांगा।

घटना के सिलसिले में सीबीआई जांच की मांग पर जोर देते हुए मामले के एक याचिकाकर्ता भाजपा नेता और उच्चतम न्यायालय के वकील अश्विनी उपाध्याय ने अदालत में आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के स्वयंभू नेता रामवृक्ष यादव को उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का अनुचित समर्थन था। यादव के समर्थकों ने जवाहर बाग पर लंबे समय से कब्जा कर रखा था जिसे खाली कराने के लिए दो जून को कार्रवाई की गई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया, राज्य सरकार ने रामवृक्ष यादव के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जबकि जवाहर बाग पर कब्जे की अवधि के दौरान उसके और उसके अनुयायियों के खिलाफ 16 प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं।

उन्होंने कहा, उसने 2014 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी के एक शीर्ष नेता के लिए व्यापक प्रचार किया था और उसके एवज में राज्य सरकार जाहिर तौर पर उसे विशालकाय सार्वजनिक पार्क सौंपने की कोशिश कर रही थी। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब देने को कहा और अगली सुनवाई के लिए एक अगस्त की तारीख तय की। उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद गत दो जून को जवाहर बाग को खाली कराने की कार्रवाई में अतिक्रमणकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ जिसमें दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया।

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