नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने तंदूर हत्याकांड में दोषी करार दिए गए युवक कांग्रेस के पूर्व नेता सुशील शर्मा की उस अर्जी पर जवाब देने के लिए दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को एक आखिरी मौका दिया है जिसमें उसने समय से पहले तिहाड़ जेल से अपनी रिहाई की गुहार लगाई है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने साफ कर दिया कि यदि दिल्ली सरकार अपना जवाबी हलफनामा दायर कर यह नहीं बताती है कि उसने किन आधारों पर समय से पहले रिहाई की शर्मा की अर्जी खारिज की, तो सुनवाई की अगली तारीख को दिल्ली सरकार के गृह विभाग के उप-सचिव को व्यक्तिगत तौर पर पेश होना होगा। इस निर्देश के साथ अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 सितंबर तय कर दी।
अदालत ने पहले सरकार को निर्देश दिया था कि यदि उप-राज्यपाल ने शर्मा के मामले में कोई आदेश पारित किया था, तो वह उसे रिकॉर्ड पर लाए। दिल्ली के गृह मंत्री की अध्यक्षता वाले सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) की ओर से किए गए फैसले के बावजूद समय से पहले रिहाई उप-राज्यपाल की मंजूरी पर निर्भर करती है। वकील सुमित वर्मा के जरिए दाखिल अपनी अर्जी में शर्मा ने आरोप लगाया है कि फैसले को अंतिम रूप देने के बाबत सक्षम अधिकारी (उप-राज्यपाल) से बगैर किसी संवाद के ही उसे 12 अप्रैल को जेल लौटने के लिए बाध्य होना पड़ा। वर्मा ने पहले अदालत को बताया था कि सरकार के गृह विभाग ने उन्हें दो मई को उप-राज्यपाल के फैसले के बारे में बताया था, जो रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया था।
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