बेंगलुरू: तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से जल छोड़ने के कर्नाटक के फैसले के विरोध में बुलाए गए राज्यव्यापी बंद से शुक्रवार को कर्नाटक में सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कर्नाटक सरकार ने तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से जल जल छोड़ना शुरू कर दिया है।उधर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करें। उन्होंने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाने को कहा है।
राज्य के करीब 500 कन्नड़ समर्थक संगठनों के महासंघ 'कर्नाटक ओक्कुटा' ने कावेरी नदी से जल छोड़े जाने के विरोध में एक दिन के बंद का आह्वान किया है जिनमें किसान, व्यापारी और व्यवसायी वर्गो का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन भी शामिल हैं।अधिकारियों ने बताया कि बंद के कारण परिवहन पूरी तरह बंद रहे और कई शहरों में जनजीवन ठप रहा।
हालांकि बंद का ट्रेनों और हवाई उड़ानों पर कोई असर नहीं रहा, लेकिन सड़क परिवहन बंद रहने के चलते बड़ी संख्या में लोग बेंगलुरू और मंगलुरू में हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर फंसे रहे।शुक्रवार को ट्रेन और हवाईजहाज पकड़ने वाले लोग बंद को देखते हुए भोर में ही हवाईअड्डों और रेलवे स्टेशनों पर पहुंच गए।बेंगलुरू मेट्रो रेल का परिचालन भी बंद रहा।
बंद के अह्वान को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूल और कॉलेजों में छुट्टी का ऐलान कर दिया था। बेंगलुरू और मैसूर में इनफोसिस, विप्रो सहित कई बड़ी आईटी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को छुट्टी दे दी थी।
बंद का आह्वान करने वाले संगठन ओक्कुटा के अध्यक्ष वटाल नागराज ने कहा, "एक दिन के बंद का आह्वान सुप्रीम कोर्ट के फैसले और राज्य सरकार द्वारा कावेरी नदी से जल छोड़ने के विरोध में किया गया, जबकि हमारे पास खुद पीने और सिंचाई के लिए पानी नहीं है।"
बंद के दौरान हालांकि दूध और दवा जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति को छूट दी गई थी। एंबुलेंस के परिचालन की भी छूट थी।राज्य सरकार ने इस दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति कायम रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और सुरक्षा गश्त बढ़ा दी।
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