श्रीनगर: कश्मीर घाटी में अशांति और अस्थिरता का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा और शुक्रवार को 63वें दिन भी कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं जिसमें दर्जनों नागरिक घायल हो गए। माहौल की गंभीरता को देखते हुए दक्षिणी कश्मीर में सेना की तैनाती होनी तय है।
शुक्रवार को पणजी में मौजूद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'घाटी में पहले की अपेक्षा स्थिति पर बेहतर नियंत्रण पा लिया गया है' तथा आने वाले दिनों में 'पूरी तरह नियंत्रण पा लिया जाएगा।'
इस बीच श्रीनगर में मौजूद सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि घाटी में तैनाती के लिए अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों को घाटी की ओर रवाना कर दिया गया है तथा मौजूदा अस्थिरता से सर्वाधिक प्रभावित दक्षिणी कश्मीर में सेना की तैनाती की जाएगी।सेना को सैन्य चौकियों और शिविरों पर पथराव की दशा में 'आत्मरक्षा' की छूट दी गई है। सूत्रों ने बताया कि सेना आने वाले दिनों में कथित तौर पर पाकिस्तान से सीमा पार कर आए आतंकवादियों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर सकती है।
इस बीच घाटी में लगातार 63वें दिन सड़कों पर विरोध प्रदर्शन, सुरक्षा प्रतिबंध, अलगाववादियों द्वारा बुलाई गई बंद के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा तथा दुकानें, कारोबारी संस्थान, स्कूल एवं निजी तथा सरकारी कार्यालय बंद रहे।
सप्ताह की शुरुआत में हटा लिए गए कर्फ्यू को हिंसा की आशंका को देखते हुए फिर से लगा दिया गया। लेकिन श्रीनगर, दक्षिणी एवं उत्तरी कश्मीर के विभिन्न इलाकों में लोग कर्फ्यू के बावजूद विरोध प्रदर्शित करने सड़कों पर उतर आए और सरकार विरोधी एवं आजादी के समर्थन में नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पथराव भी किया, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों को पैलेट गन चलाने पड़े जिससे दर्जनों नागरिक घायल हो गए। अधिकारियों ने श्रीनगर की जामिया मस्जिद में दोपहर में सामूहिक तौर पर होने वाली जुमे की नमाज अदा करने की इजाजत नहीं दी। पुलिस ने बताया कि जुमे की नमाज के बाद पथराव की आशंका को देखते हुए जामिया मस्जिद इलाके में कर्फ्यू लगा दी गई है।
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