नई दिल्ली: सड़सठवें गणतंत्र दिवस का समापन बीटिंग द रिट्रीट के साथ हुआ। हर साल 29 जनवरी को चार दिन की रिपब्लिक डे सेरेमनी का अंत बीटिंग द रिट्रीट से होता है। दिल्ली के विजय चौक पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी हुई।
इस बार क्यों खास है बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी ?
इस बार की बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी कई मायनों में खास है। पहली बार शास्त्रीय संगीत और भारतीय वाद्य यंत्रों को बीटिंग द रिट्रीट में रखा गया। भारतीय वाद्य यंत्र 'भारत हमको जान से प्यारा है' की धुन बजायी गई। इस बार राज्य पुलिस और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के बैंड भी शामिल किए गए।. BSF, ITBP, दिल्ली पुलिस के बैंड संविधान','अभिनंदन','करियप्पा' की धुन बजी। सेरेमनी में 'सारे जहां से अच्छा','सेनानी','एयरबॉर्न','मिली-जुली' की धुन भी बजीं।
बीटिंग द रिट्रीट...बैरक में सेना की वापसी का प्रतीक
इस बार कुल 26 धुनों में से 20 धुनें भारतीय संगीतकारों ने तैयार की और 15 मिलिट्री बैंड, 18 पाइप एंड ड्रम बैंड ने हिस्सा लिया। नेवी और एयरफोर्स का एक-एक बैंड भी बीटिंग द रिट्रीट में शामिल हुआ। सेरेमनी के प्रिंसिपल कंडक्टर थें कमांडर वी सी डिक्रूज और मिलिट्री बैंड के कंडक्टर हैं सूबेदार मेजर रमेश सिंह।
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