1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. दूसरी अयोध्या की राह पर भोजशाला, क्या होगी आज पूजा या नमाज?

दूसरी अयोध्या की राह पर भोजशाला, क्या होगी आज पूजा या नमाज?

मंदिर-मस्जिद के विवाद ने अयोध्या को साम्प्रदायिकता का प्रतीक बना दिया है, अब यही हालात मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला को लेकर बनने लगे हैं।

bhojshala

हिंदूवादी संगठन लगातार आंदोलन करते आ रहे हैं, उन्होंने सोमवार को शहर में शोभायात्रा निकाली थी, तो मंगलवार को सड़क पर खड़े होकर पूजा की थी और भोजशाला के भीतर नहीं गए थे। वसंत पंचमी को पूरे प्रदेश से हिंदुओं के पहुंचने का हिदूवादी संगठनों ने आह्वान किया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने हिंदूवादी संगठनों की वसंत पंचमी को दिन भर पूजा करने की मांग पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब भोजशाला में किसी की मूर्ति ही नहीं है तो विश्व हिंदू परिषद के लोग किसकी पूजा करने जाते हैं। धार के पुलिस अधीक्षक हिंगणकर ने आईएएनएस से कहा है कि शांति बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त किए गए हैं।

bhojshala

धार एक ऐतिहासिक नगरी है यहां परमार वंश के राजा भोज ने 1010 से 1055 ईवी तक शासन किया। उन्होंने 1034 में धार नगर में सरस्वती सदन की स्थापना की। तब यह एक महाविद्यालय था जो बाद में भोजशाला के नाम से विख्यात हुआ। बाद में यहां मां सरस्वती (वाग्देवी) की प्रतिमा स्थापित की गई। इस प्रतिमा को 1880 में एक अंग्रेज व्यक्ति अपने साथ लंदन ले गया। वर्तमान में यह प्रतिमा लंदन में ही है। भोजशाला को 1909 में संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया। बाद में भोजशाला को पुरातत्व विभाग के अधीन कर दिया गया। ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर पता चलता है कि कुछ लोगों द्वारा भोजशाला को मस्जिद बताए जाने पर धार स्टेट ने ही 1935 में परिसर में शुक्रवार को जुमे की नमाज पढ़ने की अनुमति दे दी। तभी से यह व्यवस्था चली आ रही, कई बार विवाद बढ़ने पर कई वर्षो के लिए नमाज और पूजा का दौर भी थमा रहा। वर्ष 2003 से पूजा और नमाज का सिलसिला लगातार चला आ रहा है।

Latest India News