नई दिल्ली: कहते हैं कि अगर आप चाह लें तो क्या कुछ नहीं कर सकते। हममे से काफी सारे लोग अपनी मातृभाषा के अलावा कई और भाषाओं को सीखने के लिए हजारों रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन फिर भी हम उस भाषा का 2 से 3 फीसदी हिस्सा ही सीख पाते हैं। कभी मौका मिले तो देश के उन चुनिंदा टूरिस्ट स्पॉट पर जाने की कोशिश कीजिएगा जहां पर विदेशी सैलानी काफी संख्या में आते हैं। आपको ऐसे जगहों पर ऐसे तमाम बच्चे मिल जाएंगे जो बेच तो छोटे-मोटे सामान(पेन-पेंसिल, मोरपंख के बने सामान आदि) बेच रहे होंगे लेकिन उनकी भाषा संबंधी दक्षता देखकर हैरत में पड़ जाएं। हम भारतीय तो ढंग से अंग्रेजी भी नहीं बोल पाते, लेकिन भारत यानी ग्रामीण हिंदुस्तान से आने वाले ऐसे ही अधिकांश बच्चे अनेक भाषाओं में इतने पारंगत होते है जो शायद इंडिया यानी मेट्रो शहरों में रहने वाले बच्चों में भी न हो। ये बच्चे अपनी रोजी रोजी के लिए फुटपाथों पर सामान की बिक्री करते हैं लेकिन हुनर में किसी से कम नहीं। चलिए आपको ऐसा ही एक बच्चा और उसके हुनर के प्रदर्शन वाला वीडियो दिखाते हैं।
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