नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव इस बार कई मायनों में खास होने जा रहा है। जहां इस बार बिहार में तकनीक का काफी अहम रोल होने वाला है वहीं बिहार के कुछ संवेदनशील इलाकों में नक्सलियों की गलत हरकत पर नजर रखने के लिए कोबरा यूनिट, डॉग स्क्वायड और नेत्रा ड्रोन की तैनाती की भी योजना है। इसमें कोई दोराय नहीं कि अभी तक के हालात को देखते हुए इस चुनाव में भाजपा का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। वहीं भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं ने पार्टी को अहम जीत दिलाने के लिए बिहार के अधिकांश क्षेत्रों को वार रूम में तब्दील कर दिया है। इन वार रूम के जरिए चुनाव से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को सीधे तौर पर मुख्यालय को भेजा जा रहा है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी बिहार में काफी वक्त बिता रहे हैं और हर मतदाता पर अपनी खास पकड़ बनाने के लिए भाजपा भी हर तकनीक आजमाने को आतुर दिख रही है।
क्या है बिहार का गणित-
- बिहार में कुल 243 विधानसभा क्षेत्र हैं।
- जदयू-राजद और कांग्रेस का महागठबंधन भाजपा के सामने बड़ी चुनौती।
- महागठबंधन में 100 सीटों पर जेडीयू, 100 सीटों पर राजद और 40 सीटों पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार उतारेगी। वहीं एनसीपी को सिर्फ 3 सीटें दी गई हैं।
- भाजपा रामविलास पासवान की लोजपा और जीतन राम मांझी के हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को साथ रख दलितों में दुसाध और मुसहर जैसे बड़े दलित समूह का समर्थन पाने की सोच रही है। वहीं लालू यादव के वोट बैंक को तोड़ने के लिए भाजपा पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी को भी अपने गठबंधन में शामिल कर सकती है।
- नीतीश को महादलित, कोइरी, कुर्मी, जैसी मध्य जातियों के साथ साथ कुछ फीसद सवर्णो का मत आता दिख रहा है। वहीं राज्य की युवा आबादी का भी नीतीश के प्रति आकर्षण बढ़ने की संभावना है।
- वैसे तो सवर्णों के वोट भाजपा के पक्ष में एकजुट होते हैं लेकिन इस बार ब्राह्मणों का वोट बैंक भाजपा और कांग्रेस में बंट भी सकता है।
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