इलाहाबाद: भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक शुरू होने के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने भले ही चुप्पी साध रखी हो लेकिन क्षेत्रीय नेताओं एवं उनके समर्थकों ने अपना संदेश पहुंचाने और अपनी पसंद बताने के लिए बैनर पोस्टरों को जरिया बनाया है।
राज्य के विभिन्न नेताओं में सांसद वरूण गांधी का चेहरा शहर में बैठक स्थल के आसपास और सड़कों में लगे बैनरों, पोस्टरों में सबसे अधिक दिख रहा है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की तस्वीर भी कुछ स्थानों पर पोस्टरों में दिख रही है जिन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
शहर में कई स्थानों पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह की तस्वीर भी दिख रही है जो प्रदेश के एक प्रमुख नेता है। सिंह की तस्वीर कई स्थानों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ दिख रही है। ओबीसी नेता और केंद्रीय मंत्री उमा भारती की तस्वीर पोस्टरों पर काफी कम नजर आ रही है।
पार्टी ने हालांकि कुछ नेताओं के स्वयं को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करने के प्रयास को नरमी के संदर्भ में नहीं लिया है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ नाथ सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि वह वरूण गांधी के शुभचिंतक हैं। लेकिन निश्चित तौर पर पार्टी की पहल पर ये पोस्टर नहीं आए।
सिंह ने कहा, मैं केवल इतना कह सकता हूं कि राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में पार्टी किसी को पेश नहीं कर रही है और बैनर, पोस्टर लोकप्रियता के मानदंड नहीं होते। पार्टी अभी भी इस विषय पर विचार कर रही है कि असम की तरह मुख्यमंत्री पद का चेहरा पेश किया जाए या नहीं। पार्टी में अनेक लोगों का मानना है कि राजनाथ सिंह अधिकांश कारकों पर अन्य लोगों से भारी पड़ते हैं लेकिन वह पूर्व में राज्य की राजनीति में शामिल होने के बारे में अनिच्छा प्रकट कर चुके हैं और पार्टी नेतृत्व का भी इस बारे में दो तरह का विचार है कि क्या वे सर्वश्रेष्ठ विकल्प होंगे।
एक प्रश्न के जवाब में सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि जहां तक कांग्रेस का सवाल है, उनका अब प्रभाव नहीं रह गया है। हां, मायावती है और अखिलेश यादव की सपा हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन रणनीति क्या होगी, मैं नहीं समझता कि राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में इस बारे में चर्चा होगी। यह पार्टी की संसदीय बोर्ड करेगी।
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