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#Budget2016: देश के बजट जो हमेशा याद किए जाएंगे

देश में अब तक पेश गए बजटों में से चुनिंदा बजट ने देश की अर्थव्यवस्था को काफी हद तक प्रभावित किया। जानिए कुछ ऐसे बजट के बारे में जिन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

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नई दिल्ली: किसी देश का बजट यह बताने के लिए काफी होता है कि देश इस वित्तीय वर्ष में विकास की किन ऊंचाइयों को छूने के लिए आगे बढ़ेगा। यानी बजट अर्थव्यवस्था की तस्वीर होता है। इस साल का केंद्रीय बजट 29 फरवरी को पेश किया जाएगा। आज हम आपको अपनी बजट सीरीज में यह बताने की कोशिश करेंगे कि देश में अब तक पेश गए बजटों में से चुनिंदा बजट ने देश की अर्थव्यवस्था को काफी हद तक प्रभावित किया। जानिए कुछ ऐसे बजट के बारे में जिन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

साल: 1957
वित्त मंत्री: टी टी कृष्णामाचारी
बजट पेश करने का दिन: 15 मई 1957
क्या था खास:

  • आयात के लिए लाइसेंस जरूरी हुआ
  • एक्सप्रोट रिस्क इन्श्योरेंस कॉरपोरेशन के गठन का फैसला।
  • वेल्थ टैक्स लगा।
  • इस बजट के बाद बाहरी कर्ज लेना काफी मुश्किल हो गया।
  • एक्साइज ड्यूटी बढ़कर 400 फीसदी हो गई।
  • आयकर बढ़ा।

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साल: 1973
वित्त मंत्री: यशवंत राव बी चव्हाण
बजट पेश करने का दिन: 28 फरवरी 1973
क्या था खास:

  • सामान्य बीमा कंपनियों, भारतीय कॉपर कॉरपोरेशन और कोयले की खदानों का राष्ट्रीयकरण।
  • इस साल के बजट का अनुमानित घाटा 550 करोड़ था।
  • इस बजट को द ब्लैक बजट बोला गया।
  • कोयले पर सरकारी नियंत्रण हो जाने के कारण बाजार में कॉम्पिटीशन के लिए जगह नहीं बची।
  • भारत पिछले 40 सालों से कोयला आयात कर रहा है।

साल: 1987
वित्त मंत्री: राजीव गांधी
बजट पेश करने का दिन: 28 फरवरी 1987
क्या था खास:

  • इस बजट को गांधी बजट बोला गया।
  • न्यूनतम निगम कर के संबंध में बड़ा फैसला। न्यूनतम निगम कर MAT लाया गया। इसका उद्देश्य भारी मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को कर के दायरे में लाना था।
  • आज यही MAT सरकार की आय का बड़ा जरिया है।

साल: 1997
वित्त मंत्री:  पी चिंदबरम
बजट पेश करने का दिन: 28 फरवरी 1997
क्या था खास:

  • लोगों और कंपनियों के लिए लागू टैक्स प्रावधानों में बदलाव।
  • काले धन को बाहर लाने के लिए वॉलंटियरी डिस्क्लोजर ऑफ इनकम स्कीम (VDIS) लॉन्च की।
  • इस बजट के बाद लोगों ने खुद से अपनी आय का खुलासा करना शुरु कर दिया।
  • इस बजट का असर यह हुआ कि 2010-11 के बीच लोगों से बतौर इनकम टैक्स एक लाख करोड़ रुपए से ऊपर सरकार को प्राप्त हुए।
  • औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला, क्योंकि लोगों के हाथ में पैसा आ चुका था जिसने मांग बढ़ा दी।

साल:  2005
वित्त मंत्री: पी चिदंबरम
बजट पेश करने का दिन: 28 फरवरी 2005
क्या था खास:

  • वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) को पेश किया।
  • ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार और आमदनी का जरिया खुला।

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