नई दिल्ली: देश के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइलमैन के नाम से मशहूर डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम अब हमारे बीच नहीं हैं, और वे सदा के लिए अमर हो गए है। देश गमजदा है और करोड़ों युवाओं ने अपना सबसे चहेता शिक्षक खो दिया है।
जी हां शिक्षक,यहीं तो उनकी सबसे बेहतरीन और सही पहचान थी और डॉक्टर कलाम खुद अपने आप को शिक्षक ही मानते थे, और वे कहते थे कि मैं शिक्षक हूं और इसी रूप में पहचाना जाना चाहता हूं। और जैसा वह चाहते थे मानों विधाता भी उनकी इस बात के आगे नतमस्तक होकर उनको अपने पास उसी अंदाज में, उनके सबसे बेहतरीन काम को करने का अवसर देते हुए, अपने पास वापस बुला लिया। और इसके साथ ही संसार की पाठशाला से एक बेहतरीन उम्दा और खुली आंखो से सपने देखने का सपना दिखाने वाला शिक्षक काल ने हमसे छीन लिया। करोड़ों छात्रों का सबसे पसंदीदा शिक्षक युवा छात्रों से अपने दिल की बात कहते हुए बहुत दूर चले गए।
बेशक वे हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी यादें, उनके सपने और एक शिक्षक के रूप में उनकी सिखाई बातें हमारे बीच में हैं,जो आने वाली जनरेशन के लिए प्रेरणा का काम करेंगी।
लेकिन अपनी अंतिम यात्रा पर निकलने से पहले कलाम को दो सवालों ने परेशान कर रखा था और वे उनका जवाब खोजना चाहते थे। इस बात का जिक्र उन्होंने अपनी शिलांग यात्रा के दौरान अपने सहयोगी सृजन पाल सिंह से साझा भी किए थे ।
अगली स्लाइड में पढ़ें उन दो सवालों के बारे में.......
पहला सवाल : संसद का डेडलॉक कैसे खत्म किया जाए ?
दूसरा सवाल : धरती को जीने लायक कैसे बनाया जाए ?
जी हां मीडिया से बात करते हुए उनके सहयोगी सृजन पाल सिंह ने इस बात का खुलासा करते हुए कहा है कि इन दो सवालों के जवाब की तलाश डॉक्टर कलाम को थी और वे उनके जवाब की खोज में थे। संसद के डेडलॉक पर वे आईआईएम शिलांग के छात्रों से भी बात करना चाहते थे। लेकिन विधि का विधान देखिए बातचीत शुरु ही हुई थी,संवाद चल ही रहे थे कि विधाता की लिखी पटकथा के सबसे बड़ें नॉयक का रोल यहीं खत्म हो जाना था।
शेष जो बचा रह गया उनकी बातें, प्रेरणा और सपने देखने का हुनर। लेकिन सबसे खास सवाल और उनकी जिंदगी का अंतिम वाक्य जो आप से सवाल करता है, धरती को जीने लायक कैसे बनाया जाए ? क्या आपके पास है इस सवाल का जवाब?
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