बेंगलूरू :कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़ने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश को अमल में नहीं लाया जा सकने वाला बताते हुए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने अगला कदम तय करने के लिए बुधवार को कैबिनेट की और सर्वदलीय बैठक बुलाई है। उधर पूरे बेंगलूरू में निषेधाज्ञा लागू कर दी गयी है।
सिद्धरमैया ने यहां संवाददाताओं से कहा, सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी किया है। लेकिन चूंकि हमारे पास पानी नहीं है, इसलिए इसे लागू करना बहुत कठिन है। यह लागू नहीं किया जा सकने वाला आदेश है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने जमीनी हकीकत के आधार पर कावेरी सुपरवाइजरी कमेटी के सामने कुछ तथ्य रखे थे लेकिन उसने फिर भी राज्य सरकार को 21 से 30 सितंबर तक रोजाना 3000 क्यूसेक पानी देने का आदेश जारी किया था।
उन्होंने कहा कि समिति का गठन उच्चतम न्यायालय ने ही किया है। शीर्ष अदालत ने पांच सितंबर को तमिलनाडु को समिति के पास जाने का निर्देश दिया था और कर्नाटक से भी पड़ोसी राज्य की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा था। सिद्धरमैया ने कहा कि इस सबके बावजूद उच्चतम न्यायालय ने आदेश पारित कर दिया।
बेंगलूरू के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस बीच पूरे शहर में पुलिस तैनात कर दी गयी है ताकि कोई अप्रिय घटना नहीं घटे। पूरे शहर में धारा 144 लगा दी गयी है। उन्होंने जनता से शांति बनाये रखने की अपील की और आश्वासन दिया कि सरकार राज्य और उसकी जनता तथा किसानों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
सिद्धरमैया ने कहा कि राज्य सरकार को उच्चतम न्यायालय के आदेश की प्रति का इंतजार है। कल राज्य मंत्रिमंडल विचार-विमर्श करेगा, जिसके बाद सर्वदलीय बैठक होगी। इस बीच कानूनी विशेषग्यों से भी परामर्श किया जाएगा।
उन्होंने कहा, हम आदेश के सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे। सभी दलों के नेताओं के विचार और राय जानने के बाद हम आगे बढ़ेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कर्नाटक को बुधवार से 27 सितंबर तक तमिलनाडु को प्रतिदिन 6000 क्यूसेक कावेरी जल देना होगा। शीर्ष अदालत ने कल सुपरवाइजरी समिति द्वारा तय की गयी 3000 क्यूसेक की पानी की मात्रा को बढ़ा दिया।
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