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शस्त्र लाइसेंस मामला: CBI ने J&K, दिल्ली में कई जगह छापे मारे

सीबीआई ने कुपवाड़ा, उधमपुर, किश्तवाड़, शोपियां, राजौरी, डोडो, पुलवामा और कुछ अन्य जगहों के तत्कालीन जिलाधिकारियों और मजिस्ट्रेटों के परिसरों पर दिसंबर 2019 में श्रीनगर, जम्मू, गुरुग्राम और नोएडा समेत एक दर्जन जगहों पर छापेमारी की थी।

CBI carries out search at 40 locations in Jammu kashmir Delhi in Arms licence case शस्त्र लाइसेंस मा- India TV Hindi
Image Source : ANI शस्त्र लाइसेंस मामला: CBI ने J&K, दिल्ली में कई जगह छापे मारे

श्रीनगर/नई दिल्ली. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अनिवासियों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर हजारों शस्त्र लाइसेंस जारी करने के आरोप से संबंधित मामले में शनिवार को जम्मू कश्मीर में 40 जगहों और राष्ट्रीय राजधानी में छापे मारे। यहां अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि शस्त्र लाइसेंस रैकेट से संबंधित एक मामले में चल रही जांच के तहत जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर, राजौरी, अनंतनाग, बारामूला और दिल्ली में IAS अधिकारियों, करीब 20 ‘गन हाउस’ सहित लोकसेवकों के आधिकारिक और आवासीय परिसरों में छापे मारे गए।

अधिकारियों ने बताया कि कम से कम दो IAS अधिकारियों शाहिद इकबाल चौधरी और नीरज कुमार के परिसरों पर छापेमारी हो रही है। सीबीआई ने कुपवाड़ा, उधमपुर, किश्तवाड़, शोपियां, राजौरी, डोडो, पुलवामा और कुछ अन्य जगहों के तत्कालीन जिलाधिकारियों और मजिस्ट्रेटों के परिसरों पर दिसंबर 2019 में श्रीनगर, जम्मू, गुरुग्राम और नोएडा समेत एक दर्जन जगहों पर छापेमारी की थी। अभियान 2019 में दर्ज एक मामले के संबंध में चलाया जा रहा है।

आरोप है कि 2012 और 2016 के बीच जम्मू कश्मीर के विभिन्न जिलों के उपायुक्तों ने धन के लालच में फर्जी और अवैध रूप से थोक में शस्त्र लाइसेंस जारी किया था। सीबीआई ने पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के विभिन्न जिलों में वहां के जिलाधिकारियों और मजिस्ट्रेट द्वारा कथित तौर पर लगभग दो लाख शस्त्र लाइसेंस जारी करने से संबंधित दो मामलों की जांच के सिलसिले में तलाशी ली थी।

आरोप है कि रिश्वत के बदले में गैर कानूनी रूप से ये शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए। आरोप है कि तत्कालीन लोक सेवकों ने अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर राज्य के गैर निवासियों को नियमों का उल्लंघन कर शस्त्र लाइसेंस जारी किया और रिश्वत ली। राजस्थान आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने 2017 में इस घोटाले का खुलासा किया था और अवैध रूप से शस्त्र लाइसेंस जारी करने में संलिप्तता के आरोप में 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस के अनुसार, कथित रूप से सेना के जवानों के नाम पर 3,000 से अधिक परमिट दिए गए थे। एटीएस के निष्कर्षों के आधार पर, जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल एन एन वोहरा ने मामले में जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया था। 

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