नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि उनके अधिकारियों को सम्मन जारी करने में सीबीआई ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। सीबीआई ने इस आरोप का जोरदार खंडन किया। सीबीआई के सू़त्रों ने दिल्ली सचिवालय से सोमवार को मिले एक लिखित पत्राचार का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार के निजी स्टाफ से एजेंसी की पूछताछ के लिए खुद केजरीवाल ने मंजूरी दी थी। अधिकारी को फोन पर पूछताछ के लिए बुलाए जाने के उनके दावे को खारिज करते हुये सीबीआई सूत्रों ने बताया कि पत्राचार के जरिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गई हैं।
मुख्यमंत्री के ट्विटर पर किए गए इस दावे के बाद यह प्रतिक्रिया सामने आई कि उनके स्टॉफ को बिना नोटिस के फोन पर सम्मन जारी किए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरीके से अब तक 150 अधिकारियों को सम्मन जारी किए गए हैं। एक समाचारपत्र के रिपोर्ट का हवाला देते हुए केजरीवाल ने ट्वीट किया, सीबीआई ने अनौपचारिक तरीके से फोन कर बिना किसी नोटिस के दिल्ली के मुख्यमंत्री के स्टॉफ को पूछताछ के लिए बुलाया है। अन्य मंत्री के स्टॉफ को भी पूर्व में इसी तरह फोन कर बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ नहीं छुपाएगी, लेकिन सीबीआई को सही प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
अपने कई ट्वीट के जरिए केजरीवाल ने कहा, सीबीआई सीआरपीसी की किस धारा का इस्तेमाल कर फोन पर सम्मन जारी करती है। अब तक, फोन पर 150 से अधिक अधिकारियों को सम्मन जारी किया गया। उन्होंने कहा, हम कुछ भी नहीं छुपा रहे हैं। मैंने सभी अधिकारियों से सहयोग करने को कहा है। लेकिन सीबीआई को कानून का पालन करना चाहिए, उचित नोटिस के जरिए सम्मन जारी करे। सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि सचिवालय में अधिकारियों से मिली प्रतिक्रिया में कहा गया है कि पूछताछ के लिए मुख्यमंत्री से अनुमति मिली है। इसमें यह भी कहा गया कि सीबीआई एक साथ उनकी उपस्थिति की मांग ना करें क्योंकि इससे कामकाज प्रभावित होता है जिस पर एजेंसी रजामंद है।
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