नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (SC) ने उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम युवक की कथित तौर पर हत्या की CBI जांच पर रोक से इनकार कर दिया है। बीते मंगलबार को CBI जांच पर रोक लगाने से इनकार करते हुए न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे तथा न्यायमूर्ति अशोक भूषण की सुप्रीम कोर्ट की एक अवकाश पीठ ने शाहबाद के चार अधिकारियों जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक तथा शाहबाद पुलिस थाने के S.H.O के सुदूरवर्ती जगह पर स्थानांतरण के आदेश पर रोक लगा दिया।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सहारनपुर के निवासी मुस्लिम युवक मुस्तैन की हत्या की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। वह पांच मार्च की आधी रात के बाद कुरुक्षेत्र के शाहबाद से सहारनपुर एक भैंस लेकर आ रहा था। मुस्तैन का शव दो अप्रैल को हरियाणा के एक नाले से बरामद हुआ था।
उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि चारों अधिकारियों का स्थानांतरण इलाके से दूर किसी जगह पर गैर महत्वपूर्ण पद पर किया जाए, ताकि वे भगवा समूह गौ रक्षा दल के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई कथित हत्या की जांच को प्रभावित न कर सकें। चारों अधिकारियों के स्थानांतरण के उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा, "जांच को चाहे कोई भी एजेंसी अंजाम दे रही हो, हम इसे अपने आदेश का हिस्सा नहीं बनाने जा रहे हैं।"
हरियाणा सरकार की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय से कहा कि मृतक के पिता ताहिर हसन ने भी मामले की जांच को सीबीआई के हवाले करने की कोई गुजारिश नहीं की थी। मेहता ने न्यायालय से कहा कि उच्च न्यायालय ने मामले को सीबीआई को सौंपते हुए यह भी नहीं देखा कि हरियाणा पुलिस की जांच में कोई खामी है भी या नहीं। लेकिन, शीर्ष अदालत पर मेहता की इस दलील का असर नहीं हुआ।
मेहता ने कई बार कहा कि राज्य की पुलिस को जांच रिपोर्ट दायर करने की अनुमति दी जाए और फिर भी अगर शीर्ष अदालत को सही लगे तो वह मामले की जांच सीबीआई को करने की अनुमति दे। लेकिन, इस पर न्यायालय ने कोई आदेश पारित नहीं किया। मेहता की दलील को ठुकराते हुए अवकाश पीठ ने कहा, "नहीं, अगर आप चाहते हैं, तो इसे कर सकते हैं। आप याचिका दायर कर सकते हैं। किसी आदेश की जरूरत नहीं है।"
शाहबाद के चारों अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश पारित करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति फतेह दीप सिंह ने कहा था कि 15 दिनों के अंदर अधिकारियों को किसी सुदूरवर्ती जगह पर स्थानांतरित कर दिया जाए। साथ ही इस बात को सुनिश्चित किया जाए कि सुनवाई का अंतिम परिणाम आने तक उनका स्थानांतरण इस क्षेत्र में दोबारा नहीं हो।
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