नई दिल्ली: सीबीआई ने विवादास्पद स्टिंग सीडी मामले में प्राथमिक जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को गुरुवार को तलब किया। इस सीडी में वह बागी कांग्रेस विधायकों के साथ सौदेबाजी की कोशिश में बिचौलिए से कथित रूप से बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने रावत को जांच में शामिल होने के लिए सोमवार को बुलाया है। राज्य सरकार की सिफारिश पर प्राथमिक जांच दर्ज की गई थी और केंद्र ने अधिसूचना जारी की थी। उत्तराखंड फिलहाल राष्ट्रपति शासन के अंतर्गत है। रावत को अट्ठाईस मार्च को विश्वास मत का सामना करना था, उससे दो दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की अगुवाई में नौ बागी कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उत्तराखंड विधानसभा में विश्वास मत पर समर्थन करने के लिए रावत ने रिश्वत की पेशकश की थी और उन्होंने उस स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो जारी कर दिया था।
उत्तराखंड में कब और कैसे लगा राष्ट्रपति शासन:
- 18 मार्च को उत्तराखंड विधानसभा में धन विधेयक पर बहस के दौरान भाजपा ने वोटिंग की मांग की लेकिन स्पीकर ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया।
- धन विधेयक ध्वनिमत से पास हो गया। कांग्रेस के 9 विधायकों ने बगावत कर भाजपा का साथ दिया। बागी विधायकों ने भाजपा के साथ मिलकर सदन में बहुमत का दावा किया। इस बहुमत में भाजपा के 27 और 9 बागी विधायकों समेत 35 की संख्याबल का दावा किया गया।
- 18 मार्च को ही सभी बागी विधायकों ने भाजपा के साथ मिलकर राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया।
- सभी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की और फिर राष्ट्रपति से मुलाकात कर हरीश रावत की सरकार को बर्खास्त करने की मांग की गई।
- 19 मार्च को राज्य के राज्यपाल केके पाल ने ने हरीश रावत को बहुमत साबित करने के लिए 28 मार्च तक का वक्त दिया।
- स्पीकर ने दल बदल कानून का उल्लंघन करने के लिए 9 बागी विधायकों को उनकी सदस्यता रद्द करने का नोटिस भेजा। उन्हें 26 मार्च को ही इस पर शाम तक जवाब देना था।
- 26 मार्च को बागी विधायकों ने दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान हरीश रावत का एक स्टिंग आपरेशन जारी किया। इस स्टिंग में हरीश रावत अपनी सरकार को बचाने के लिए विधायकों को करोड़ों रुपए देने का ऑफर देते नजर आए। यहीं से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की भूमिका तैयार हो गई थी।
- 27 मार्च को हरीश रावत के सदन में विश्वास मत हासिल करने से पहले ही रविवार के दिन राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
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