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लोकसभा में मांग: सूखा प्रभावित राज्यों को विशेष पैकेज दे केंद्र सरकार

सूखे और पेयजल संकट का स्थायी समाधान निकालने पर जोर देते हुए अनेक सदस्यों ने लोकसभा में सरकार से मांग की कि नदियों को जोड़ने की दिशा में ठोस पहल की जाए और प्रभावित इलाकों में किसानों का कर्ज माफ किया जाए।

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नई दिल्ली: देश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज देने और गंभीर पेयजल संकट का स्थायी समाधान निकालने पर जोर देते हुए अनेक सदस्यों ने बुधवार को लोकसभा में सरकार से मांग की कि नदियों को जोड़ने की दिशा में ठोस पहल की जाए और प्रभावित इलाकों में किसानों का कर्ज माफ किया जाए। सदन में नियम 193 के तहत कई राज्यों में सूखे और पेयजल संकट से उत्पन्न स्थिति और संकट को दूर करने के लिए स्थायी समाधान विषय पर अधूरी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के आर धु्रव नारायण ने कहा कि देश में भयंकर सूखे की स्थिति है तथा प्रधानमंत्री को प्रभावित इलाकों का दौरा करना चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के कर्ज का ब्याज माफ करने और विशेष पैकेज दिए जाने की मांग की। भाजपा के वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि सूखा एक प्राकृतिक प्रकोप है और जब प्रकृति से छेड़छाड़ कर भौतिक विकास किया जाता है तो प्रकृति उसका जवाब देती है। उन्होंने सूखे से निपटने के लिए सांसदों को अपने अपने इलाकों में यज्ञ करने का सुझाव भी दिया। भाजपा के ही सुनील कुमार सिंह ने कहा कि पिछले 60 वर्षो तक देश में शासन करने के बावजूद कांग्रेस के शासनकाल में झारखंड के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। अभी वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर राज्य के लिए सिंचाई योजना को आगे बढ़ाया गया है।

उन्होंने कहा कि देश में सूखे और बाढ़ के गंभीर हालात को देखते हुए नदियों को जोड़ने की परियोजना को आगे बढ़ाया जाए, चाहे कितना भी खर्च क्यों न आए। इंडियन नेशनल लोकदल के दुष्यंत चौटाला ने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजना बहुत महंगी है और इससे पहले नदियों पर बांध बनाकर बारिश के पानी का संचयन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संसद की कृषि संबंधी समिति ने लिखकर दिया है कि हरियाणा भी सूखा प्रभावित राज्यों में है लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार ने केंद्र को इस संबंध में सूचित नहीं किया है। चौटाला ने कहा कि सतलुज यमुना लिंक नहर पर उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद फिर पंजाब हरियाणा से झगड़ा करेगा कि हमारा पानी ले लिया। उन्होंने कहा कि पानी को राष्ट्रीय सम्पत्ति बनाया जाए।

भाजपा के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि सूखा का विषय कोई नया नहीं है। हर साल बाढ़ और सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है और मानसून की अनिश्चितता के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा कि हम प्रकृति से छेड़छाड़ कर रहे हैं, पहाड़ों को तोड़ रहे हैं और पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। सूखे की समस्या के स्थायी समधान के लिए कोई पहल नहीं की गई है।

सिग्रीवाल ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार ने सूखे एवं बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदी जोड़ो परियोजना की संकल्पना की थी लेकिन उसके बाद आई कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने इसे आगे नहीं बढ़ाया। हम सरकार से मांग करते हैं कि नदी जोड़ो परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। राजद से निष्काषित राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि देश सूखे से प्रभावित है, भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और नदियों के पानी को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण स्थिति और खराब हो गई है। ऐसे में वर्ष जल संचय के लिए तंत्र बनाने की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए।

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