नई दिल्ली: ब्रह्मचारी कौटिल्य जिन्हें आज भी पूरी दुनिया आचार्य चाणक्य के नाम से जानती है उन्होंने धर्मनीति के साथ साथ कूटनीति और राजनीति का पाठ पूरी दुनिया को पढ़ाया है। आपसी रिश्तों और पति पत्नी संबंधों पर अपनी गहरी राय रखने वाले चाणक्य ने ऐसी तमाम नसीहतें भी दी हैं जिन्हें मानकर कोई आज के समय में भी फायदा उठा सकता है। आचार्य का कहना था कि हर किसी काम के लिए एक निश्चित वक्त और निश्चित सलीका होता है और हमें इसका पालन करना चाहिए। जानिए आचार्य चाणक्य ने किस सलीके के साथ किन चीजों को करना विष-तुल्य बताया है। जानिए चाणक्य के गूढ़ विचार।
बिना शस्त्रों और तैयारी के अभ्यास करना विष पीने जैसा-
आचार्य का कहना था कि अगर आप बिना किसी शस्त्र और तैयारी के अभ्यास के दंगल में कूद जाते हैं तो यह आपके लिए विष पीने के समान है। शास्त्रों के मुताबिक हमें अपने ज्ञान का निरंतर अभ्यास करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति बिना अभ्यास किए स्वयं को शास्त्रों का ज्ञाता बताता है तो भविष्य में उसे अपमान भी झेलना पड़ सकते है। वो बड़े बुजुर्ग कहते हैं न किसी ज्ञानी व्यक्ति का अपमान होता है तो यह उसके लिए विष पीने का जैसा है। वैसे भी अधूरा ज्ञान खतरनाक माना जाता है।
Latest India News