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Hindi News भारत राष्ट्रीय छत्तीसगढ़ ने पेश की मिसाल, 13 ट्रांसजेंडर को मिली पुलिस कांस्टेबल की नौकरी

छत्तीसगढ़ ने पेश की मिसाल, 13 ट्रांसजेंडर को मिली पुलिस कांस्टेबल की नौकरी

छत्तीसगढ़ पुलिस ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों का आत्मबल बढ़ाने और उनके प्रति समाज की अवधारणा बदलने के प्रयास के तहत 13 ट्रांसजेंडर को कांस्टेबल पद पर भर्ती किया है।

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रायपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों का आत्मबल बढ़ाने और उनके प्रति समाज की अवधारणा बदलने के प्रयास के तहत 13 ट्रांसजेंडर को कांस्टेबल पद पर भर्ती किया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने बताया कि राज्य में पुलिस चयन प्रक्रिया के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय के 13 लोगों को कांस्टेबल के पद के लिए चुना गया है। इन सभी लोगों को योग्यता के आधार पर चुना गया है तथा दो अन्य प्रतीक्षा सूची में हैं। अवस्थी ने बताया कि रायपुर जिले से आठ, राजनांदगांव जिले से दो तथा बिलासपुर, कोरबा और सरगुजा जिलों से एक-एक उम्मीदवार की नियुक्ति कांस्टेबल के पद पर हुई है।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस विभाग ट्रांसजेंडर समुदाय के सभी चयनित उम्मीदवारों को बधाई देता है तथा उनका स्वागत करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस समुदाय के और लोग पुलिस में अपनी सेवाएं देंगे। राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद के लिए वर्ष 2017-18 में परीक्षा आयोजित की गई थी। इस महीने की एक तारीख को परीक्षा का परिणाम आया। कांस्टेबल के पद के लिए चयनित होने वाले ट्रांसजेंडर शिवन्या उर्फ राजेश ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह पुलिस की वर्दी पहनने के सपने को कभी पूरा कर सकेंगे।

शिवन्या ने कहा कि उनके पिता साइकिल ठीक करने का काम करते थे और उनकी मां घरों में काम करती थी। उन्होंने कहा कि वे आठ भाई-बहन हैं, इसलिए उनके परिवार का खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता था। शिवन्या ने कहा कि उन्होंने स्कूली शिक्षा तक अपनी पहचान किसी के सामने प्रकट नहीं होने दी, लेकिन उनके सहपाठी उनके चलने और बोलने के तरीके का मजाक उड़ाते थे। उन्होंने कहा कि कॉलेज पहुंचने के बाद उन्होंने आजादी से जीने का फैसला किया और लोगों के समक्ष अपनी पहचान उजागर कर दी। वह बाद में नाच गाकर भीख मांगने वाली 'बधाई टोली' में शामिल हो गए और रेलगाड़ियों में भीख मांगने लगे।

शिवन्या ने कहा, ‘‘मेरे माता-पिता इस बात से अंजान थे कि मैं क्या काम कर रहा हूं, लेकिन बाद में मोहल्ले के एक व्यक्ति ने मुझे देख लिया और परिवार को इस बारे में बता दिया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब मेरे माता-पिता को इसकी जानकारी मिली कि तो उन्होंने कहा कि यह काम करने से मेरे भाई बहनों की शादी में दिक्कत आ सकती है और मैंने 'बधाई टोली' छोड़ दी।’’ शिवन्या ने कहा, ‘‘बधाई टोली छोड़ने के बाद मैंने मां के साथ काम पर जाना शुरू किया, लेकिन वहां मुझे अपमान झेलना पड़ा। समाज ने जब मुझे स्वीकार नहीं किया, तो मैंने एक बार फिर 'बधाई टोली' से जुड़ने के लिए घर छोड़ दिया।’’ उन्होंने बताया कि पिछले साल उनके पिता की मौत हो गई और अब वह ही अपनी बीमार मां की देखभाल कर रहे हैं।

कला संकाय से स्नातक शिवन्या से जब पूछा गया कि उन्होंने पुलिस में शामिल होने के बारे में कैसे सोचा, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए काम करने वाली समाजिक कार्यकर्ता विद्या राजपूत के कहने पर पुलिस में शामिल होने की तैयारी शुरू की। विद्या राजपूत ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को पुलिस में मौका देने की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष जारी था और वर्ष 2017-18 में पुलिस विभाग ने इस समुदाय को मौका दिया, तब राज्य के विभिन्न जिलों से कांस्टेबल पद के लिए 40 ट्रांसजेंडर लोगों ने आवेदन किया था।

राजपूत ने कहा, ‘‘इन लोगों की समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। चयन से पहले अन्य उम्मीदवार ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों का मजाक उड़ाते थे, लेकिन जब उन्होंने उनके जज़्बे और संकल्प को देखा तो वे उनके साथ घुल मिल गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब इन उम्मीदवारों ने ट्रांसजेंडर श्रेणी में अपना आवेदन पत्र भरा, तब उनके माता पिता ने उन्हें डांटा तथा कुछ ने उनकी पिटाई भी की। उनके माता-पिता चाहते थे कि वे पुरूष श्रेणी में आवेदन करें, लेकिन इसके बावजूद उनका मनोबल कम नहीं हुआ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने समानता की ओर पहला कदम बढ़ा दिया है। हालांकि अभी लंबा रास्ता तय करना है।’’

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