परंपरा के नाम पर बच्चों पर जुल्म क्यों ?
बाल विवाह मामले में राजस्थान महिला आयोग ने चितौड़़गढ़ के डीएम को तलब किया है। आयोग ने पूरे मामले पर डीएम से जवाब मांगा है वहीं राज्य बाल आयोग की अध्यक्ष ने कहा है कि जागरुकता की कमी की वजह से इस तरह की शादियां हो रही हैं। बाल विवाह की ये खबरें सामने आने के बाद ये जानने की कोशिश की कि आखिर राजस्थान में बाल-विवाह क्यों हो रहे हैं तो पता चला है कि ये सब परंपरा के नाम पर हो रहा है। वो परंपरा जो सदियों पुरानी है लेकिन 21वीं सदी में भी लोग उसे छोड़ने को तैयार नहीं हैं और नतीजा ऐसे बाल विवाह हैं।
बाल विवाह की वजह गरीबी ?
दरअसल राजस्थान के कई जिलों में आज भी अगर परंपरा के नाम पर नाबलिग बच्चों की शादियां हो रही हैं तो उसकी एक वजह गरीबी बताई जा रही है। जिस घर में एक लड़की शादी की उम्र की होती है उसी के साथ लोग परिवार की बाकी बच्चियों की भी शादी कर देते हैं ताकि एक ही बार में एक ही खर्चे में सभी लड़किय़ों की शादी हो जाए और फिर उन्हें शादी का खर्च न उठाना पडे़। यही वजह है कि आज भी राजस्थान में एक साथ कई जोड़ों का बाल विवाह कराया जाता है।
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