क्यों इस्लाम में है गाय सरताज और क्यों मना है गौमांस '
क्यों इस्लाम में है गाय सरताज और क्यों मना है गौमांस '
India TV News Desk
Published : Aug 04, 2015 11:49 am IST, Updated : Aug 04, 2015 11:52 am IST
नई दिल्ली: हिन्दू धर्म में गाय को देवी और माँ का दर्ज़ा दिया गया है। गाय की पूजा से जहां धार्मिक आस्था जुड़ी हुई वहीं उसे प्रतिदिन रोटी खिलाने से जुड़ा है भावनात्मक लगाव। लेकिन
इस्लाम में गाय का महत्व
गाय चौपायों की सरदार है" – कुरान
गाय का दूध-घी शिफा (दवा) है और गौमांस बीमारी है" - मोहम्मद साहब
खुदा के पास खून और गोश्त नहीं पहुँचता - त्याग की भावना पहुँचती है"
बाबर से बहादुर शाह जफ़र तक के शासन काल में गोहत्या प्रतिबंधित थी
बहादुर शाह जफर ने स्वयं मुनादी फिरवाई थी कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी करने वाले को तोप से उड़ा दिया जायेगा
गो हत्या करने वाले के विरुद्ध, क़यामत के दिन, मोहम्मद साहब गवाही देंगे - देव बंद के फतवे का सार
मुग़ल बादशाह बाबर, हुमायूं, अकबर, जहाँगीर एवं अहमद शाह ने भी गोहत्या पर प्रतिबन्ध लगाया था
बिला सक तुम्हारे लिए चौपायों मे भी सीख है| पेट मे से गोबर और खून के बीच मे से साफ़ दूध जो पीने वालों के लिए स्वाद वाला है - कुरान सरीफ़ १६-६६
मुसलमानों को गाय को नहीं मारना चाहिए ऐसा करना हदीस के खिलाफ़ है - मौलाना हयात साहब खानखाना हाली समद साहब
काहिर व बरकत” से पता चलता है की सरीफ़ मक्का ने भी गौ हत्या पर पाबन्दी लगवायी थी - मौलाना फारुखी