नई दिल्ली: दादरी की घटना को लेकर प्रसिद्ध लेखिका नयनतारा सहगल और साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने साहित्य अकादमी सम्मान लौटा दिया है।
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 88-वर्षीय भांजी नयनतारा सहगल के अनुसार वह दादरी की घटना से आहत है और उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर देश की सांस्कृतिक विविधता कायम न रख पाने का आरोप लगाते हुए ये सम्मान लौटाने का फैसला किया है।
सहगल को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार वर्ष 1986 में उनके अंग्रेज़ी उपन्यास 'रिच लाइक अस' के लिए दिया गया था। सहगल अपने राजनीतिक विचारों को बेबाक तरीके से व्यक्त करने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने वर्ष 1975-77 के दौरान इंदिरा गांधी द्वारा इमरजेंसी लगाए जाने के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया था।
अशोक वाजपेयी को विभिन्न कविताओं के लिए वर्ष 1994 में उन्हें भारत सरकार द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाज़ा गया था। उन्होंने भी मोदी सरकार पर देश की सांस्कृतिक विविधता कायम न रख पाने का आरोप लगाते हुए उन्हें दिया गया साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली से सटे यूपी में दादरी के बिसाहड़ा गांव में भीड़ ने एक वायुसेना कर्मी के 50 वर्षीय पिता की पीट-पीटकर इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि यह अफवाह उड़ी थी कि उसने और उसके परिवार ने गोमांस खाया और घर में रखा था। इस अफवाह के बाद गांववाले मोहम्मद अखलाक और उसके बेटे को घर से बाहर घसीटकर लाए और उन्हें ईंटों से जमकर पीटा।
इस घटना में अखलाक की मौत हो गई, वहीं उसका 22 साल का बेटा दानिश एक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। उसकी दो मस्तिष्क सर्जरी की गई है।
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