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‘पाकिस्तान में जितने भी आतंकी संगठन हैं, सबके निशाने पर भारत’

26/11 मुंबई हमलों के मुख्य गवाह डेविड कोलमैन हेडली की गवाही आज भी जारी रही। हेडली ने आज कोर्ट को बताया कि पाकिस्तान में जितने भी आतंकी संगठन सक्रिय हैं, सबके निशाने पर भारत है और लश्कर-ए-तैयबा को भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों की ताज महल होटल में होने वाली

david headley- India TV Hindi
david headley

नई दिल्ली: 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य गवाह डेविड कोलमैन हेडली की गवाही आज भी जारी रही। हेडली ने आज कोर्ट को बताया कि पाकिस्तान में जितने भी आतंकी संगठन सक्रिय हैं, सबके निशाने पर भारत है और लश्कर-ए-तैयबा को भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों की ताज महल होटल में होने वाली बैठक की जानकारी थी और उसी बैठक को निशाना बनाकर हमला किया जाना था लेकिन बाद में प्लान रद्द कर दिया गया। उसने यह भी बताया कि वह 2003 में मेजर पाशा से और 2006 में लाहौर में मेजर इकबाल से मिला था। लांडीकोठल में जिस अब्दुल रहमान पाशा से मिला वो आर्मी का रिटायर्ड मेजर था। वह छह बलूच में तैनात था जो रिटायरमेंट के बाद लश्कर में आया और बाद में अलकायदा में शामिल हो गया।

खुलासे जारी रखते हुए हेडली ने कहा, मैं वर्ष 2006 की शुरूआत में आईएसआई के मेजर इकबाल से लाहौर में मिला था। उन्होंने मुझे भारत की खुफिया सैन्य जानकारी एकत्र करने के लिए कहा था। उन्होंने मुझे जासूसी के लिए भारतीय सेना से भी किसी को नियुक्त करने के लिए कहा था। मैंने मेजर इकबाल से कहा था, मैं उनके कहे मुताबिक काम करूंगा। हेडली ने अदालत को बताया, मैं इस अदालत को यह नहीं बता सकता कि लश्कर-ए-तैयबा के किस व्यक्ति विशेष ने भारत में आतंकी कृत्यों को अंजाम देने के निर्देश दिए। पूरा समूह ही जिम्मेदार था। हालांकि हम यह कयास लगा सकते हैं कि चूंकि लश्कर के अभियानों का प्रमुख जकी-उर-रहमान था, ऐसे में तार्किक तौर पर सभी आदेश उसी की ओर से आए होंगे। हेडली ने यह भी कहा, वर्ष 2007 के नवंबर और दिसंबर में लश्कर-ए-तैयबा ने मुजफ्फराबाद में एक बैठक की थी, जिसमें :संगठन में हेडली के आका: साजिद मीर और किसी अबु काहसा ने शिरकत की था। इस बैठक में यह तय हुआ था कि आतंकी हमले मुंबई पर बोले जाएंगे।

हेडली ने कहा, मुंबई के ताज होटल की रेकी का काम मुझे सौंपा गया था। उनके :साजिद और कहासा: पास जानकारी थी कि ताज होटल के सम्मेलन कक्ष में भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों की बैठक होने वाली है। वे लोग उसी समय हमले की योजना बनाना चाहते थे। उसने कहा, उन लोगों ने ताज होटल का एक प्रतिरूप:डमी: भी बनाया था। हालांकि वैज्ञानिकों की बैठक रद्द हो गई थी। हेडली ने कहा कि नवंबर 2007 से पहले, यह तय नहीं था कि भारत में आतंकी कृत्यों को किस स्थान पर अंजाम दिया जाएगा। इस मामले में सरकारी गवाह बन चुके 55 वर्षीय हेडली ने आगे कहा कि उसने लश्कर के नेताओं हाफिज साहब और जकी-उर-रहमान साहब के साथ इस बात पर चर्चा की थी कि लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने और इसे प्रतिबंधित करने के अमेरिकी सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती देना अच्छा रहेगा।

किसी अज्ञात स्थान से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गवाही दे रहे हेडली ने कहा, हाफिज ने कहा कि यह अच्छा ख्याल है लेकिन उन्होंने इस पर इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा। जकी को लगा कि यह एक लंबी प्रक्रिया होगी और पाकिस्तानी सरकार की आईएसआई जैसी कई एजेंसियों को इसमें शामिल होना पड़ेगा। मुंबई हमलों में अपनी भूमिका के चलते अमेरिका में 35 साल कारावास की सजा काट रहे हेडली ने यह भी कहा कि उसकी पत्नी ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ उसके संबंधों की शिकायत पुलिस में कर दी थी। हेडली ने कहा, दिसंबर 2007 में, मेरी पत्नी फैजा ने लाहौर की रेसकोर्स पुलिस के पास यह शिकायत दर्ज कराई थी कि मैंने उससे धन ठगा है। हेडली ने कहा, जनवरी 2008 में, उसने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास में शिकायत दर्ज कराई कि मैं आतंकी गतिविधियों में लिप्त हूं और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ हूं। उसने कहा, बाद में जब मैंने उससे इस शिकायत के बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया कि ऐसा लगता है कि अमेरिकी अधिकारियों को उस पर यकीन हो गया है।

हेडली ने कल अपनी पहली गवाही में अदालत को बताया था कि पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई में 26:11 के हमलों से पहले दो बार हमले करने की कोशिश की थी लेकिन दोनों बार प्रयास विफल रहे। 26:11 के हमलों में 166 लोग मारे गए थे। खुद को लश्कर-ए-तैयबा का कट्टर समर्थक बताते हुए हेडली ने विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम द्वारा की जा रही जिरह में यह भी माना कि वह आतंकी संगठन के संस्थापक हाफिज सईद के भाषणों से प्रभावित और प्रेरित होकर लश्कर से जुड़ा था।

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