मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर रघुराम राजन ने महीनों से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए अपने सहकर्मियों से आधिकारिक रूप से कह दिया है कि वह दूसरे कार्यकाल के इच्छुक नहीं है और सितंबर में अपना कार्यकाल पूरा होने पर शिक्षा जगत में वापस लौट जाएंगे। राजन के इस स्पष्टीकरण के तुरंत बाद केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने उनकी भूमिका की तारीफ की और कहा कि उनके उत्तराधिकारी के नाम की जल्द ही घोषणा की जाएगी।
राजन ने अपना फैसला सहकर्मियों को संबोधित 888 शब्दों के एक पत्र में जाहिर किया है, जिसकी एक प्रति आईएएनएस के पास भी है। सितंबर 2013 से केंद्रीय बैंक के 23वें गर्वनर के रूप में अपने कार्यकाल को दर्शाते हुए राजन ने कहा है कि उन्होंने वृद्धि के बजाए पहले सुधार पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि काफी कुछ किया गया, लेकिन अभी भी कई काम अधूरे रह गए हैं।
उन्होंने कहा, "सरकार से चर्चा के बाद, मैं आपसे साझा करना चाहूगा कि चार सितंबर, 2016 को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद मैं वापस शिक्षा जगत में लौट रहा हूं। जब भी देश को मेरी जरूरत होगी, मैं हमेशा उपलब्ध रहूंगा।" उन्होंने कहा है कि वह अमेरिकी विश्वविद्यालय लौट रहे हैं, जहां से वह छुट्टी पर थे। राजन ने कहा कि उनके कार्यकाल में जो काम अधूरा रह गया, वह है केंद्रीय बैंक की नीतियों के संदर्भ में मोटे तौर पर मार्गदर्शन के लिए एक समिति का गठन और बैंकों के बैलेंस शीट को दुरुस्त करना।
राजन के दूसरे कार्यकाल को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही थीं। ज्यादातर लोग उन्हें दूसरा कार्यकाल दिए जाने के पक्ष में थे, क्योंकि उनका मानना था कि कठिन समय में वह भारत के एक सबसे अच्छे गर्वनर साबित हुए, लेकिन कुछ ने उनकी आलोचना भी की थी।
यही नहीं, राजन को दूसरा कार्यकाल दिलाने के लिए एक ऑनलाइन याचिका भी दायर की गई, जिसे आईआईटी के पूर्व विद्यार्थियों समेत दसियों हजार लोगों का समर्थन मिला। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने खास तौर से राजन के खिलाफ कठोर रुख अपनाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन्हें हटाने की मांग की। लेकिन इस मुद्दे पर मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली खामोश बने रहे।
जेटली ने शनिवार को कहा, "सरकार आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन द्वारा किए गए अच्छे काम की सराहना करती है और उनके फैसले का सम्मान करती है।" उन्होंने कहा कि राजन के उत्तराधिकारी की जल्द ही घोषणा की जाएगी।
इस बारे में अटकलबाजी को तब हवा मिली, जब दो हफ्ते पहले आनंदबाजार पत्रिका ने राजन के करीबी सूत्र के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा कि वह दूसरे कार्यकाल को लेकर ज्यादा इच्छुक नहीं हैं। इसे तब और भी बल मिला जब मोदी ने कहा, "मैं नहीं सोचता की प्रशासनिक फैसले मीडिया की रुचि के विषय होने चाहिए।"
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