नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने जहां सम-विषम परिवहन योजना का एक जनवरी से क्रियानन्वयन के लिए कमर कस ली है, वहीं दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली सरकार से अकेली महिला चालकों और दोपहिया वाहनों को सम-विषम योजना से छूट देने पर स्पष्टीकरण मांगा।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वयंसेवकों (नागरिक रक्षा, नेशनल कैडेट कोर तथा नेशनल सर्विस स्कीम के कर्मियों) से सम-विषम परिवहन योजना में उनकी भूमिका से उन्हें अवगत कराने के लिए छत्रसाल स्टेडियम में मुलाकात की।
न्यायमूर्ति हीमा कोहली और न्यायमूर्ति सुनील गौर की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह इस बात का स्पष्टीकरण करे कि इस तरह के छूट की जरूरत क्यों है। न्यायालय ने हालांकि महिलाओं व दोपहिया वाहनों को योजना में छूट को खत्म करने के लिए दायर याचिका पर किसी प्रकार का आदेश जारी करने से इंकार कर दिया।
न्यायालय ने दिल्ली सरकार से सम-विषम परिवहन योजना के परीक्षण के दौरान प्रदूषण के स्तर व परिचालित वाहनों का आंकड़ा सौंपने के लिए कहा। सम-विषम परिवहन योजना से संबंधित विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई कर रहे न्यायालय ने मामलों की सुनवाई की अगली तारीख छह जनवरी मुकर्रर की।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली सरकार ने पहली जनवरी से 15 जनवरी तक सम-विषम नंबर की गाड़ियों को एक-एक दिन के अंतराल पर चलाने की योजना बनाई है। यह योजना सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक के लिए रहेगी। रविवार को यह रोक नहीं रहेगी। कुछ महत्वपूर्ण हस्तियों और आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है।
न्यायालय ने एक अन्य याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वकीलों को सम-विषम फार्मूले से छूट देने की मांग की गई थी। न्यायालय ने कहा कि वकीलों को छूट देने का अर्थ यह होगा कि ऐसी छूट चाहने वालों की याचिकाओं की बाढ़ आ जाएगी।
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