नई दिल्ली: आप विधायक अखिलेश त्रिपाठी के खिलाफ सरकारी फ्लैट के गैरकानूनी इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर दबाव बनाने के आरोप को दिल्ली उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना किसी उचित अनुमति के विधायक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती है। अदालत ने कहा कि बिना किसी पूर्व अनुमति के मेजिस्ट्रेट किसी जनसेवक के खिलाफ मिली शिकायत में सीआरपीसी की धारा 1563 संज्ञेय मामले की जांच के लिए पुलिस अधिकारी का अधिकार का इस्तेमाल कर किसी जांच का आदेश नहीं दे सकता है।
विशेष सीबीआई जज पूनम चौधरी ने कहा, शिकायतकर्ता के वकील का यह कहना गलत है कि सीआरपीसी की धारा 1563 के तहत अधिकार के इस्तेमाल के लिए किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं है। इसलिए किसी पूर्व अनुमति के बगैर मेजिस्ट्रेट धारा 1563 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए किसी तरह की जांच के आदेश नहीं दे सकते हैं।
अदालत ने त्रिपाठी, एक महिला अधिकारी जिसे गुलाब बाग में फ्लैट आवंटित किया गया था और उस फ्लैट में रहने वाली एक महिला के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी। आदेश में कहा गया कि विधायक के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अनुमति की जरूरत है। उन्होंने कहा, जनसेवक के खिलाफ काईवाई करने के लिए उचित अनुमति कानूनन जरूरी है।
जनसेवक और महिला के बाबत अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप सरकारी संपत्ति अवैध कब्जेदार की बेदखली अधिनियम, 1971, के तहत लगाए गए हैं और शिकायतकर्ता विवेक गर्ग अधिनियम के तहत दी गई कानूनी मदद ले सकते हैं। आरटीआइ कार्यकर्ता गर्ग ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि यह फ्लैट वीना को आवंटित किया गया था और एक पीडब्ल्यूडी अधिकारी के निरीक्षण के दौरान यह पता चला कि इस घर में सीमा नाम की महिला किराए पर अपने परिवार के साथ रह रही थी। नवंबर 2014 में वीना को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था लेकिन उनकी ओर से कोई संतोषप्रद जवाब नहीं आया।
शिकायत में कहा गया है कि फ्लैट में अनाधिकृत व्यक्ति के रहने से यह साफ हो जाता है कि यह मामला दिल्ली प्रशासन या दिल्ली सरकार से धोखाधड़ी का है। इस शिकायत में आगे कहा गया है कि त्रिपाठी ने पीडब्ल्यूडी से फ्लैट के आवंटन के मामले को लंबित रखने के लिए कहा क्योंकि यह मामला पीडब्ल्यूडी मंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता था और उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए गैरकानूनी तरीके से यह काम करवाया।
शिकायतकर्ता ने विधायक और दो महिलाओं के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश करने के लिए कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत लोकसेवक को भ्रष्ट और गैरकानूनी तौर-तरीकों से प्रभावित करने पर भी कार्रवाई की मांग की है।
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