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ऑड-ईवन फार्मूला: दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कार-पूलिंग की, तो पर्यटन मंत्री मोटरसाइकिल से पहुंचे ऑफिस

नई दिल्ली: दिल्ली में प्रदूषण दूर करने के लिए लागू किए गए सम-विषम फार्मूले के चलते आज दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज कार-पूलिंग की, ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने बस में यात्रा की, जबकि दिल्ली

Delhi Tourism minister reached office by motorcycle- India TV Hindi
Delhi Tourism minister reached office by motorcycle

नई दिल्ली: दिल्ली में प्रदूषण दूर करने के लिए लागू किए गए सम-विषम फार्मूले के चलते आज दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज कार-पूलिंग की, ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने बस में यात्रा की, जबकि दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा मोटरसाइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे। दिल्ली में पहली जनवरी से 15 जनवरी तक सम-विषम नंबर योजना लागू है। वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार द्वारा शुरू की गई निजी वाहनों के लिए सम-विषम योजना के पहले दिन शुक्रवार को मिश्रा ने आईएएनएस को बताया कि उन्हें यमुना विहार से दिल्ली सचिवालय पहुंचने में 20 मिनट का समय लगा।

मिश्रा ने कहा, "ऐसा लग रहा है कि दिल्ली ने इस योजना को स्वीकार कर लिया है। मैं बहुत खुश हूं।" यह योजना रविवार के अलावा प्रतिदिन सुबह आठ से शाम आठ बजे तक के लिए ही लागू की गई है। मिश्रा ने कहा, "मैं अगले 15 दिनों तक अपनी कार में अकेले सफर नहीं करूंगा। मैं या तो कार पूलिंग कर या फिर मोटरसाइकिल से सफर करूंगा।" पर्यटन मंत्री के अनुसार, सामान्य कार्यदिवस पर उन्हें अपने घर से दिल्ली सचिवालय तक का सफर तय करने में करीब एक घंटे का समय लगता था।

 

delhi chief minister arvind kejriwal did car pooling today

उधर, आईआईटी कानपुर के अध्ययन के विश्लेषण पर आप पाएंगे कि दिल्ली में मौजूद सभी वाहनों में से सबसे बड़े प्रदूषक ट्रक हैं, जो कि कुल प्रदूषण में लगभग 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं। इसके बाद दोपहिया वाहन हैं, जो कुल प्रदूषण के दो-तिहाई हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं। चौपहिया वाहन दिल्ली के प्रदूषण के सिर्फ दसवें हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।

यदि सम-विषम योजना वाली तरकीब को देखा जाए तो कुल कारों में से आधे वाहन जनवरी के पहले पखवाड़े में सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक सड़कों से गायब रहेंगे। इससे सैद्धांतिक तौर पर चौपहिया वाहनों से होने वाले प्रदूषण में 50 प्रतिशत कमी आनी चाहिए लेकिन चूंकि वे सबसे बड़े प्रदूषक हैं ही नहीं, ऐसे में हवा के पहले से साफ हो जाने की उम्मीद करना कुछ ज्यादा ही बड़ी कल्पना हो जाएगी।

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