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क्या होता है निजी मुचलका और यह जमानत से अलग क्यों?

नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पचास-पचास हजार के निजी मुचलके पर जमानत मिल गई है।

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नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पचास-पचास हजार के निजी मुचलके पर जमानत मिल गई है। इन दोनों को आज पटियाला हाउस कोर्ट में करीब 3 बजे पेश होना था। सोनिया और राहुल की तरफ से कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने बेल की मांग की जिसका विरोध याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने किया। आपको बता दे स्वामी ही वो शख्स हैं जिन्होंने इस पूरे मामले को खोला था। वहीं कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 20 फरवरी दोपहर 2 बजे का वक्त मुकर्रर किया है। सुनावाई के दौरान अदालत परिसर को सुरक्षा कारणों के मद्देनजर बंद कर दिया गया था।

अक्सर लोग जमानत और मुचलके को लेकर कन्फ्यूज्ड रहते हैं। आज हम अपनी खबर के जरिए आपको बताने की कोशिश करेंगे कि आखिर सिक्योरिटी बॉन्ड और पर्सनल बॉन्ड में तकनीकी रूप से क्या अंतर होता है।

क्या है मुचलका और जमानत-

अगर किसी भी व्यक्ति को सीधे-सीधे जेल न भेजकर छोड़ा जाता है तो उससे दो तरह के बॉन्ड भरवाए जाते हैं। एक सिक्योरिटी बॉन्ड और दूसरा पर्सनल बॉन्ड। आमतौर पर अदालत दोनों तरह के बॉन्ड जारी करने का आदेश देती है। कानूनी पहलू यह कहता है कि अदालत किसी को भी सिर्फ पर्सनल बॉन्ड पर छोड़ सकती है। सामान्य हिंदुस्तानी भाषा में सिक्योरिटी बॉन्ड को जमानत और पर्सनल बॉन्ड को मुचलका कहा जाता है।

बेल बॉन्ड- यह एक प्रकार का समझौता होता है। इसमें बेल के लिए एक निश्चित राशि मजिस्ट्रेट/अदालत को देनी पड़ती है लेकिन अगर व्यक्ति समझौते का पालन नहीं करता है तो जो भी धनराशि जमा की जाती है उसे जब्द कर लिया जाता है।

पर्सनल बॉन्ड- इस तरह के बॉन्ड में किसी भी तरह की राशि जमा नहीं की जाती है, लेकिन अगर आप नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं तो आपको निर्धारित राशि देनी पड़ती है।

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