नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को सूचित किया है कि राजनीतिक दल उस नयी मशीन को लाने के मुद्दे पर बंटे हुए हैं, जो गोपनीयता बढ़ाने के लिए मतदान के रूझान को उजागर होने से रोकती है।
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यह मशीन मतदान के बाद ईवीएम मशीनों की नियंत्रक इकाई से जोड़ी जाती है और यह संपूर्ण परिणाम दे देती है। यह प्रत्येक मतदान केंद्र के आधार पर परिणाम नहीं बताती है। इस तरह राजनीतिक दल यह नहीं जान पाते हैं कि किस इलाके ने उनके खिलाफ मतदान किया है। जब ईवीएम नहीं थीं, तब विभिन्न मतदान केंद्रों के मतपत्रों को गणना से पहले आपस में मिला दिया जाता था। इस तरह मतदान में किसी क्षेत्र विशेष के रूझान को उजागर होने से बचाया जाता था।
आयोग की ओर से कानून मंत्रालय को लिखा गया पत्र अब मंत्रियों के एक दल के समक्ष रखे गए दस्तावेजों का हिस्सा है। इस दल का गठन पिछले माह यह जानने के लिए किया गया था कि भविष्य के चुनाव में मशीन का इस्तेमाल होना चाहिए या नहीं? ऐसा पता चला है कि मंत्रियों का दल इस टोटलाइजर मशीन के पक्ष में है लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय मंत्रिमंडल को दी गई सिफारिशों के आधार पर ही लेगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय दल का गठन किया गया था। इस दल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल को इस संदर्भ में सिफारिश देनी थी कि मशीनों का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं?
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