नई दिल्ली: गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के बाद वैदिक विधि और मंत्रोच्चार के साथ भगवान बद्री विशाल के मंदिर का कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के मौके पर पूरे मंदिर को फूलों से सजाया गया। भक्तों में भगवान विष्णु के दर्शन के लिए काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
हिन्दुओं के चार धामों में से एक बद्रीनाथ 1200 साल से भी अधिक समय से ये हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। आदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में इस पवित्र मंदिर का निर्माण कराया था। तभी से यहाँ दर्शन की परंपरा चली आ रही है।
भक्तों का कहना है कि, 'भगवान विष्णु अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते, सिर्फ दर्शन करने से उनकी सारी मुरादे पूरी हो जाती है।'
अधिकारियों का कहना है कि, भूकंप का असर भले ही देश के कुछ हिस्सों में दिखा हो लेकिन उत्तराखंड प्रशासन पूरे चुनौती से निपटने को तैयार है। 2013 की त्रासदी के बाद इस बार प्रशासन चौकस है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हर तरह की तैयारियां की गई हैं ताकि यात्रा के दौरान उन्हें कोई दिक्कत न हो।
बद्रीनाथ चार धाम यात्रा का अंतिम पड़ाव होता है।
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