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Photo Blog: कोलकाता से दिल्ली तक यूं सजती हैं दुर्गा की मूर्तियां

पारिजात के पेड़ों पर सफ़ेद फूलों का आना, हवा में सुगंध का घुलना इशारा करता है कि भारत में त्योहारों का मौसम आने वाला है। शरद ऋतु के आगमन का स्वागत करते त्यौहार सब के जीवन में उमंग भर देते हैं। देश भर में दुर्गा पूजा की तैयारी ज़ोरों से चल रही हैं...

Kaynat Kazi Photography- India TV Hindi
Kaynat Kazi Photography

पारिजात के पेड़ों पर सफ़ेद फूलों का आना, हवा में सुगंध का घुलना इशारा करता है कि भारत में त्योहारों का मौसम आने वाला है। शरद ऋतु के आगमन का स्वागत करते त्यौहार सब के जीवन में उमंग भर देते हैं। देश भर में दुर्गा पूजा की तैयारी ज़ोरों से चल रही हैं। चलिए देखते हैं डॉक्टर कायनात काजी के कैमरे की नजर से...

Kaynat Kazi Photography

दुर्गा पूजा की तैयारियाँ देश भर में महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं। कोलकाता का कुमारटुली क्षेत्र में वर्षों से माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने का काम लोग पीढ़ियों से करते चले आ रहे हैं।

 

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माँ दुर्गा की मूर्ति बनाना कोई आसान काम नहीं है,साधे हुए हाथों से मिट्टी और भूसे को एक मूरत की शक्ल देना एक कला है।यह हुनर पीढ़ी दर पीढ़ी सहेज कर रखा गया है।

 

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माँ दुर्गा की मूर्ति गढ़ने से लेकर उनमें रंग भरने तक सब कुछ बड़ी मेहनत और धैर्य के काम हैं।

 

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कोलकाता के अलावा देश भर में दुर्गा पूजा की तैयारी पूरे ज़ोर शोर से शुरू हो जाती है। दिल्ली के चितरंजन पार्क में भी पश्चिम बंगाल से आए कारीगर माँ दुर्गा की मूर्तियाँ बनाने में लग जाते हैं।

 

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कोलकाता के अलावा देश भर में दुर्गा पूजा की तैयारी पूरे ज़ोर शोर से शुरू हो जाती है। दिल्ली के चितरंजन पार्क में भी पश्चिम बंगाल से आए कारीगर माँ दुर्गा की मूर्तियाँ बनाने में लग जाते हैं।यहाँ मूर्तिकार सिर्फ माँ दुर्गा की मूर्ति ही नहीं बनाते बल्कि उनके अलावा कई अन्य देवी देवताओं और असुरों की भी मूर्ति बनाई जाती है।

 

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एक तरफ जहाँ मूर्तिकार मिट्टी को आकार देने में व्यस्त होते हैं वहीँ दूसरी तरफ एक टोली माँ दुर्गा के वस्त्र और मुकुट तैयार करने में लगी होती है।

 

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यहाँ मूर्तिकार सिर्फ माँ दुर्गा की मूर्ति ही नहीं बनाते बल्कि उनके अलावा कई अन्य देवी देवताओं और असुरों की भी मूर्ति बनाई जाती है।

 

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महालया के दिन ही माँ दुर्गा की अधूरी गढ़ी प्रतिमा पर आँखें बनाईं जाती हैं जिसे चक्षु-दान कहते हैं। इस दिन लोग अपने मृत संबंधियों को भी याद करते हैं और उन्हें ‘तर्पण‘ अर्पित करते हैं। महालया के बाद ही शुरू हो जाता है देवीपक्ष और जुट जाते हैं सब लोग त्यौहार की तैयारी में, ज़ोर-शोर से।

 

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यहाँ से माँ दुर्गा को भक्तगण श्रद्धा पूर्वक पंडालों में लेजाते हैं और रोज़ शाम को माँ दुर्गा की भव्य आरती होती है। यह पूजा पूरे नौ दिनों तक चलती है।

लेखक के बारे में :
डॉक्टर कायनात काजी वैसे तो फटॉग्रफर, ट्रैवल राइटर और ब्लॉगर हैं, लेकिन खुद को वह सोलो फीमेल ट्रैवलर के रूप में ही पेश करती हैं। यायावरी उनका जुनून है और फटॉग्रफी उनका शौक। ब्लॉगिंग के लिए उन्हें देश के एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल द्वारा बेस्ट हिंदी ब्लॉगर का सम्मान भी दिया जा चुका है। हिंदी साहित्य में PHD कर चुकीं कायनात एक प्रफेशनल फटॉग्रफर हैं। कायनात राहगिरी (rahagiri.com) नाम से हिंदी का पहला ट्रैवल फटॉग्रफी ब्लॉग चलाती हैं।

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